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मध्य प्रदेश: महापौर चुनाव बिल पर कमलनाथ सरकार और राज्यपाल में ठनी

भोपाल ब्यूरो। मध्य प्रदेश में कमलनाथ सरकार और राज्यपाल के बीच महापौर चुनाव बिल को लेकर टकराव पैदा हो गया है। कांग्रेस का आरोप है कि राज्यपाल ने महापौर चुनाव बिल जानबूझ कर रोक लिया है और इसे अभी तक स्वीकृति नहीं दी है।

गौरतलब है कि कमलनाथ कैबिनेट ने 25 सितंबर को निकाय एक्ट में बदलाव कर पार्षदों के जरिए मेयर के चुनाव वाला “महापौर चुनाव बिल” पास कर दिया था। इसे स्वीकृति के लिए राज्यपाल लालजी टंडन के पास भेजा गया था लेकिन अभी तक इस बिल को स्वीकृति प्रदान नहीं की गयी है।

मध्य प्रदेश में जल्द ही नगर निगम चुनाव होने हैं। इस लिहाज से महापौर चुनाव बिल महत्वपूर्ण माना जा रहा है। कमलनाथ केबिनेट द्वारा महापौर चुनाव बिल पास किये जाने के बाद बीजेपी नेताओं ने 4 अक्टूबर को राज्यपाल से मुलाकात कर मेयर के अप्रत्यक्ष चुनाव रोकने की मांग की।

भोपाल के पूर्व और वर्तमान मेयर उमाशंकर गुप्ता और आलोक शर्मा ने राज्यपाल से मुलाकात की और ऑल इंडिया कौंसिल ऑफ मेयर की तरफ से उन्हें ज्ञापन भी सौंपा था।

महापौर चुनाव बिल को राज्यपाल की तरफ से स्वीकृति मिलने में हो रही देरी पर कांग्रेस नेता विवेक तन्खा ने ट्वीट कर कहा कि ‘सम्मानीय राज्यपाल आप एक कुशल प्रशासक थे। संविधान में राज्यपाल कैबिनेट की अनुशंसा के तहत कार्य करते हैं। इसे राज्य धर्म कहते हैं। विपक्ष की बात सुनें, मगर महापौर चुनाव बिल नहीं रोके। यह गलत परंपरा होगी. जरा सोचिए।’

महापौर चुनाव बिल को लेकर फिलहाल गेंद राज्यपाल लालजी टंडन के पाले में हैं। देखना है कि राज्यपाल इस बिल को स्वीकृति देते हैं अथवा इसमें कोई नया पेंच निकलकर सामने आता है।

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