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पैग़म्बरे इस्लाम की बेटी के रौज़े के पुनर्निर्माण की मांग को लेकर ऑस्ट्रेलिया में प्रदर्शन

सिडनी। अंतरराष्ट्रीय शोक दिवस के अवसर पर ऑस्ट्रेलिया की राजधानी कैनबरा स्थित सऊदी दूतावास के सामने सैकड़ों लोगों ने विरोध प्रदर्शन में भाग लेकर पैग़म्बरे इस्लाम की बेटी हज़रत फ़ातेमा ज़हरा के रौज़े के पुनर्निर्माण की मांग की।

1925 में इस्लामी कैलेंडर के शव्वाल महीने की 8 तारीख़ को मुसलमानों के दूसरे सबसे पवित्र शहर मदीने में पैग़म्बरे इस्लाम (स) की बेटी हज़रत फ़ातेमा ज़हरा के पवित्र मज़ार समेत इस्लाम की कई विशिष्ट हस्तियों की क़ब्रों को ध्वस्त कर दिया गया था।

सऊदी शासन और कट्टरपंथी वहाबी समुदाय द्वारा अंजाम दी गई इस्लाम विरोधी इस दुःखद घटना के बाद से दुनिया भर के मुसलमान विशेष रूप से शिया मुसलमान 8 शव्वाल को शोक दिवस के रूप में मनाते हैं और विरोध प्रदर्शनों का आयोजन करके आले सऊद शासन से हज़रत फ़ातेमा ज़हरा के रौज़े के पुनर्निर्माण की मांग करते हैं।

मंगलवार को ऑस्ट्रेलियाई मुसलमानों ने भारतीय मूल के वरिष्ठ शिया धर्मगुरू सैय्यद अबुल क़ासिम के नेतृत्व में कैनबरा स्थित सऊदी दूतावास के सामने विशाल प्रदर्शन का आयोजन किया और सऊदी अरब में जारी बड़े पैमाने पर मानव एवं धार्मिक अधिकारों के हनन को तुरंत रोके जाने की मांग की।

प्रदर्शनकारियों ने मुसलमानों के सबसे पवित्र शहरों मक्का और मदीना समेत पूरे अरब प्रायद्वीप में इस्लामी धरोहरों को सुरक्षित किए जाने की ज़रूरत पर बल दिया और कहा कि जन्नतुल बक़ी क़ब्रिस्तान समेत जिन पवित्र स्थलों को आले सऊद शासन ने ध्वस्त करके आम मुसलमों की धार्मिक भावनाओं को आहत किया है, उनका तुरंत पुनर्निर्माण किया जाए।

प्रदर्शनकारियों का नेतृत्व कर रहे मौलाना अबुल क़ासिम ने सऊदी अरब में मानवाधिकारों की स्थिति पर चिंता जताते हुए शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों के सिर क़लम किए जाने की घोर निंदा की।

उन्होंने ऑस्ट्रेलियाई सरकार से मांग की है कि वह सऊदी अरब को हथियारों का निर्यात बंद करे, क्योंकि इन हथियारों का इस्तेमाल यमन की निर्दोष जनता के जनसंहार के लिए किया जा रहा है।

वरिष्ठ शिया धर्मगुरू का कहना था कि आले सऊद शासन इस्लामी धरोहरों को नष्ट करके मुसलमानों को उनकी ऐतिहासिक और धार्मिक पहचान से वंचित करने और उन्हें उनकी जड़ों से काटने की साज़िश रच रहा है, इसलिए इस साज़िश को नाकाम बनाने और मुसलमानों में जागरुकता लाने के लिए हम अपना आंदोलन जारी रखेंगे।

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