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कांग्रेस का मोदी सरकार पर हमला: ‘इकनॉमिक मैनेजमेंट’ नहीं, ‘इवेंट मैनेजमेंट’ कर रही सरकार’

नई दिल्ली। केंद्र की मोदी सरकार द्वारा कॉर्पोरेट टेक्स में कटौती किये जाने को लेकर कांग्रेस में बड़ा हमला बोला है। कांग्रेस ने कहा कि मोदी सरकार इकनॉमिक मैनेजमेंट नहीं बल्कि इवेंट मैनेजमेंट कर रही है तथा अपने दूसरे कार्यकाल में देश के लिए ‘आर्थिक एवं राजनीति विपत्ति’ लेकर आयी है।

शुक्रवार को कांग्रेस के मुख्य प्रवक्ता रणदीप सिंह सुरजेवाला ने मोदी सरकार की घेराबंदी करते हुए कहा कि कॉर्पोरेट टेक्स में कटौती का मोदी सरकार का कदम डगमगाते सेंसेक्स बाजार को संभालने के लिए है, जबकि इससे अर्थव्यवस्था मंदी की मार से बाहर नहीं निकलने वाली है क्योंकि मध्यम वर्ग और वेतन भोगी लोगों को कोई राहत नहीं दी गयी है।

मोदी सरकार दूसरे कार्यकाल में राजनीतिक और आर्थिक विपत्ति लेकर आयी है :

मीडिया से बात करते हुए सुरजेवाला ने कहा कि अर्थव्यवस्था मंदी की मार से डूब रही है, नौकरियां जा रही हैं और फैक्ट्रियां बंद हो रही हैं। लेकिन, सरकार के मंत्री कह रहे हैं कि सबकुछ ठीक है। उन्होंने आरोप लगाया, दूसरे कार्यक्रम में मोदी सरकार राजनीतिक और आर्थिक विपत्ति लेकर आयी है।

सुरजेवाला ने तथ्यों को मीडिया के समक्ष रखते हुए कहा कि वित्त मंत्री और उनके सहयोगियों के पास बीमार अर्थव्यवस्था के लिए न दवाई है और न कोई सुझाव है। यह सरकार एक कदम आगे और चार कदम पीछे चलती है. उन्होंने यह भी कहा, मुझे खेद से कहना पड़ रहा है कि प्रधानमंत्री अर्थव्यवस्था को नौसिखयों की तरह चला रहे हैं।

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डगमगाते सेंसेक्स को संभालने के लिए दी गयी कॉर्पोरेट जगत को छूट:

सुरजेवाला ने दावा किया, काॅरपोरेट जगत को 1.45 लाख करोड़ रुपये की छूट दी गयी है. यह सिर्फ डगमगाते सेंसेक्स को संभालने के लिए किया गया है। उन्होंने सवाल किया, प्रधानमंत्री और वित्त मंत्री बतायें कि 1.45 लाख करोड़ रुपये की भरपाई कहां से होगी?

उन्होंने सवाल किया कि क्या मध्यम वर्ग, किसानों और छोटे कारोबरियों पर तरह तरह के कर लगाकर इसकी भरपाई की जायेगी? वित्तीय घाटा बढ़ेगा और उसको पूरा करने के लिए आपके पास क्या योजना है? महंगाई पर काबू पाने के लिए क्या उपाय है?

सुरजेवाला ने यह भी पूछा कि प्रधानमंत्री और वित्त मंत्री बजट की पूरी प्रक्रिया का मजाक क्यों बना रहे हैं? 45 दिनों के भीतर बजट की घोषणाओं को खारिज कर दिया, या फिर संशोधन कर दिया. संसदीय प्रणाली की ऐसी अहवेलना क्यों की गयी?

उन्होंने यह सवाल भी किया, वेतनभोगी वर्ग और मध्यम वर्ग को कर रियायत से उपेक्षित क्यों रखा गया? छोटे कारोबारियों को राहत क्यों नहीं दी गयी? क्या केवल काॅरपोरेट कर में राहत देने से मंदी दूर हो जायेगी?

सुरजेवाला ने कहा कि प्रधानमंत्री जी और वित्त मंत्री जी को यह जानना चाहिए कि देश की अर्थव्यवस्था ईमानदार सरकार के निर्णयों और कुशल नेतृत्व से चलती है, जिसका इस सरकार में अभाव है।

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मंदी और तालाबंदी बीजेपी का मूलमंत्र:

उन्होंने आरोप लगाया, यह सरकार इवेंट मैनेजमैंट करती है, आर्थिक मैनेजमेंट करती है, मंदी और तालाबंदी भाजपा का मूलमंत्र है। यह देश इवेंट मैनेजमेंट से नहीं, बल्कि इकनॉमिक मैनेजमेंट से चलेगा। यह बात जिस दिन प्रधानमंत्री और वित्त मंत्री समझ जायेंगे उस दिन लोग मंदी और तालाबंदी से निजात पा लेंगे।

इससे पहले पार्टी के वरिष्ठ नेता जयराम रमेश ने ट्वीट कर कहा, पिछले बजट के तीन महीनों के बाद और आगामी बजट के चार महीने पहले मोदी सरकार ने काॅरपोरेट कर की दर में कटौती की है। इस कदम का स्वागत है, लेकिन इस पर संदेह है कि इससे निवेश की स्थिति बेहतर हो जायेगी।

गौरतलब है कि सरकार ने सुस्त पड़ती अर्थव्यवस्था को रफ्तार देने के लिए शुक्रवार को कई बड़ी घोषणाएं की। इन घोषणाओं में कंपनियों के लिये आयकर की दर करीब 10 प्रतिशत घटाकर 25.17 प्रतिशत करना तथा नयी विनिर्माण कंपनियों के लिए कॉरपोरेट कर की प्रभावी दर घटाकर 17.01 प्रतिशत करना शामिल है।

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