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इन 7 पोइंट से समझिये: अयोध्या पर क्या है सुप्रीमकोर्ट का फैसला

नई दिल्ली। अयोध्या में विवादित भूमि के मालिकाना हक को लेकर लम्बे समय से चल रहे विवाद को लेकर सुप्रीमकोर्ट ने आज अपना ऐतिहासिक फैसला सुनाया है।

सुप्रीमकोर्ट ने विवादित ज़मीन पर निर्मोही अखाड़े और सुन्नी वक्फ बोर्ड का दावा खारिज कर दिया। सुप्रीम कोर्ट ने यह भी माना कि 1992 में बाबरी मस्जिद को ढहाना और 1949 में मूर्तियां रखना गैरकानूनी था।

गौरतलब है कि सुप्रीमकोर्ट के पांच जजों की पीठ ने अयोध्या मामले की सुनवाई की थी। इसमें चीफ जस्टिस रंजन गोगोई के अलावा जस्टिस एसए बोबड़े, जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़, जस्टिस अशोक भूषण और जस्टिस अब्दुल नजीर शामिल हैं। मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली पांच न्यायाधीशों की संविधान पीठ ने 16 अक्टूबर को 40 दिनों की मैराथन सुनवाई के बाद फैसला सुरक्षित रख लिया था।

1. कोर्ट ने कहा कि इसके सबूत हैं कि राम चबूतरा, सीता रसोई पर अंग्रेजों के आने से पहले हिंदू पूजा करते थे। रिकॉर्ड में सबूत दिखाते हैं कि विवादित स्थल के बाहर हिंदू पूजा करते थे।

2. कोर्ट ने कहा कि मस्जिद मुस्लिमों द्वारा छोड़ी नहीं गई थी। हिंदुओं ने राम चबूतरे पर पूजा करना जारी रखा लेकिन उन्होंने गर्भगृह पर भी दावा किया।

3. कोर्ट ने कहा कि हिंदुओं का विश्वास है कि भगवान राम का जन्म गुंबद के नीचे हुआ था। उनकी धार्मिक भावनाएं जुड़ी हुई हैं। मुस्लिम इसे बाबरी मस्जिद कहते हैं। हिंदुओं का यह विश्वास कि भगवान राम का अयोध्या में जन्म हुआ था, यह निर्विवाद है। आस्था निजी मामला है। चीफ जस्टिस ने कहा कि कोर्ट को आस्था और विश्वास को स्वीकार करना चाहिए। कोर्ट को बैलेंस बनाना चाहिए।

4. चीफ जस्टिस ने कहा कि बाबरी मस्जिद मीर बाकी द्वारा बनवाई गई। धर्मशास्त्र के क्षेत्र में जाना कोर्ट के लिए सही नहीं होगा। शिया वक्फ बोर्ड की 1946 की फैजाबाद कोर्ट की याचिका खारिज हुई।

5. विवादित ढांचे की जमीन हिंदुओं को दी जाये। 2.77 एकड़ ज़मीन हिन्दुओं के पक्ष में रहेगी।

6. राम मंदिर के लिए केंद्र सरकार तीन महीने के अंदर ट्रस्ट बनाएगी। ट्रस्ट में निर्मोही अखाड़ा का प्रतिनिधि भी रहेगा।

7. मुसलमानों को मस्जिद के लिए 5 एकड़ दूसरी जगह मिलेगी। केंद्र या राज्य सरकार अयोध्या में ही मस्जिद के लिए सुटेबल और प्रॉमिनेंट जगह पर जमीन दे। अधिग्रहीत जमीन फिलहाल रिसीवर के पास रहेगी।

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