30 वर्ष तक देश की सेवा करने वाले सेना के पूर्व अधिकारी का नाम भी एनआरसी से गायब

नई दिल्ली। असम में नेशनल रजिस्टर ऑफ़ सिटीजन (एनआरसी) में जिन 40 लाख लोगों के नाम गायब हैं उनमे कई वरिष्ठ और गणमान्य लोग भी शामिल हैं।

एनआरसी में जहाँ पूर्व राष्ट्रपति फकरुद्दीन अली अहमद के बेटे का नाम गायब है वहीँ तीस वर्षो तक देश की सेवा करने वाले पूर्व सैन्य अधिकारी मोहम्मद ए हक का नाम भी एनआरसी में शामिल नहीं है।

पूर्व सैन्य अधिकारी मोह्हमद ए हक ने कहा कि यह जानकार बड़ा धक्का लगा है कि एनआरसी ने उन्हें भी भारत का नागरिक मानने से इंकार कर दिया है। न्यूज़ एजेंसी एएनआई के अनुसार पूर्व सैन्य अधिकारी ने कहा कि मैंने पूरी निष्ठा के साथ देश को अपनी सेवाएं दी हैं। मैंने अपनी पूरी पैतृक जानकारी एनआरसी के लिए दी थी। इसके बावजूद मेरा नाम नहीं है। पूर्व सैन्य अधिकारी ने कहा कि मेरा नाम एनआरसी में क्यों नहीं है इस मामले में निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।

जिन 40 लाख लोगों को एनआरसी में अवैध नागरिक बताया गया है उनमें 72 साल के रिटायर्ड टीचर, 6 साल के बच्चे, एमएलए से लेकर समाजिक कार्यकर्ता भी शामिल हैं।

फिलहाल एनआरसी की वैधता को लेकर सवाल उठना शुरू हो गए हैं। लोगों का कहना है कि एनआरसी का ड्राफ्ट तैयार करने वाले लोगों ने किस तरह डेटा जुटाया होगा इसका सबूत इस बात से मिलता है कि एनआरसी के ड्राफ्ट में कई मामले ऐसे हैं जिनमें माता-पिता का नाम है तो बच्चों का नहीं तो कहीं एक भाई का नाम है तो एक का नहीं।

एनआरसी के दूसरे ड्राफ्ट में अभयपुरी से एआईयूडीएफ के पूर्व एमएलए अनंत कुमार मालो का नाम गायब है, जबकि उनकी पत्नी और भाई का नाम शामिल है।

एनआरसी को लेकर अब सवाल उठ रहे हैं कि जो लोग असम में पिछले तीन -चार दशकों से अधिक समय से रह रहे हैं, आखिर किन कारणों से उनके नाम एनआरसी में शामिल नहीं किये गए।

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