2019 से पहले मंदिर मुद्दे को फिर सुर्ख़ियों में लाने की तैयारी

नई दिल्ली। भारतीय जनता पार्टी विकास के मुद्दे पर चुनाव लड़ने की बात करती है लेकिन वह धार्मिक मुद्दों को गरमाने से भी परहेज नहीं करती। गुजरात चुनाव के लिए प्रचार के दौरान यह साफ़ हो गया कि आवश्यकता पड़ने पर बीजेपी कटटर हिंदुत्व वाले अपने पुराने चेहरे को बाहर निकालने में देर नहीं लगाएगी।

गुजरात चुनाव में विकास का मुद्दा बेधार साबित हुआ तो बीजेपी ने धार्मिक मुद्दों को गर्माने की कोशिश की। इस कोशिश के तहत राहुल गांधी ने हिन्दू रजिस्टर में साइन करने से लेकर कांग्रेस नेता मणिशंकर अय्यर के घर पाकिस्तान के पूर्व विदेश मंत्री के साथ मीटिंग का मुद्दा भी जमकर उछाला गया।

गुजरात चुनाव में विकास के मुद्दे की पैरोकारी करने वाले स्वयं पीएम मोदी ने जनसभाओं में पाकिस्तान और अहमद पटेल को गुजरात का मुख्यमंत्री बनाये जाने के लिए पाकिस्तान की साजिश का मुद्दा बनाकर पेश किया। जब राज्य के विधानसभा चुनाव में पाकिस्तान और अहमद पटेल के नाम का इस्तेमाल कर हिन्दू मतदाताओं के ध्रुवीकरण की कोशिश हो सकती है तो राष्ट्रीय स्तर के चुनाव में क्या कुछ नहीं किया जाएगा।

वहीँ अब खबर है कि बीजेपी 2019 के चुनावो के लिए अभी से कमर कस रही है। इसके तहत वह जल्द ही राम मंदिर मुद्दे को सुर्खिओं में ला सकती है। बीजेपी की प्लानिंग को देखकर लगता है कि उसे चुनाव जीतने के लिए अंततः राम नाम का ही एकमात्र सहारा है।

खबर है कि माघ मेले में 19 और 20 जनवरी को होने जा रही विश्व हिन्दू परिषद की बैठक में कई बीजेपी नेता शामिल हो रहे हैं। इस बैठक में राम मंदिर को लेकर एजेंडा तय किया जाना है।

चूँकि भारतीय जनता पार्टी जानती है कि मंदिर मामला अभी सुप्रीमकोर्ट के विचाराधीन है और फिलहाल जल्दी फैसला आने की सम्भावना नही है। ऐसे में राम मंदिर मुद्दे को गरमा कर हिन्दू मतदाताओं के ध्रुवीकरण करने के लिए बैठकों और बयानों का दौर शुरू किया जाएगा।

सूत्रों की माने तो राम मंदिर के नाम पर हिन्दू संगठनों को आगे कर इस मुद्दे को 2019 के लिए फिर से पुनर्जीवित किया जायेगा। सूत्रों ने कहा कि बसंत पंचमी के बाद से राम मंदिर पर बीजेपी नेताओं के बयान आने शुरू हो जायेंगे।

सूत्रों ने कहा कि चूँकि केंद्र और राज्य दोनो जगह बीजेपी की बहुमत वाली सरकार है, ऐसे में राम मंदिर निर्माण की अड़चने दूर क्यों नहीं हो रहीं इस पर बीजेपी कोई सफाई देने की स्थति में नहीं है। इसलिए इससे पहले कि आम हिन्दू मतदाता 2019 में बीजेपी के खिलाफ बगावत करें, पार्टी उन्हें बयानों में उलझाना चाहती है।

सूत्रों ने कहा कि विहिप के अध्यक्ष प्रवीण तोगड़िया इस मुद्दे पर बीजेपी से काफी नाराज़ बताये जाते हैं और उन्होंने राम मंदिर के नाम पर बीजेपी द्वारा सत्ता हासिल करने की पूरी दास्तां अपनी एक किताब में लिखी है। यह किताब जनवरी में लांच हो सकती है।

सूत्रों ने कहा कि इस किताब ने बीजेपी की नींद उड़ा कर रख दी है। प्रवीण तोगड़िया ने इस किताब में वह सब लिख दिया है जिसे बीजेपी जनता के सामने नहीं लाना चाहेगी। सूत्रों ने कहा कि यही कारण है कि किताब लांच होने से पहले बीजेपी को राम मंदिर निर्माण के प्रति गंभीर साबित करने के प्रयासों के तहत स्वयं इस मुद्दे को हवा देगी।

फिलहाल देखना है कि क्या बीजेपी फिर से अपने पुराने चुनावी अस्त्र के सहारे 2019 के चुनाव में उतरेगी। यदि ऐसा हुआ तो बड़ा सवाल यह भी है कि क्या जनता बार बार एक ऐसे मुद्दे पर बीजेपी के साथ खड़ी होगी जिस मुद्दे पर वह भारतीय जनता पार्टी को 1990 के बाद से लगातार वोट देती आ रही है और उसका कोई परिणाम अभी तक सामने नहीं आया है।

(राजा ज़ैद)

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