2019 से पहले आने वाली प्रणब मुखर्जी की चौथी किताब से क्यों डर रहे संघ, बीजेपी ?

नई दिल्ली: पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी की चौथी किताब इस वर्ष दिसम्बर के अंत तक रिलीज होने की संभावना है. अगर कुछ लेट भी हुआ तब भी यह किताब अगले आम चुनावो से पहले रिलीज हो जाएगी.

बीजेपी और संघ के नेताओं प्रणब मुखर्जी की इस चौथी किताब को लेकर अभी से चर्चे हो रहे हैं .मीडिया रिपोर्ट्स की माने तो आम चुनावो से पहले आने वाली इस किताब में कई बातें ऐसी हो सकती हैं जिन्हें बीजेपी और संघ के लिए आइना माना जा सकता है.

सूत्रों की माने तो इस किताब में प्रणब दा के राष्ट्रपति रहते हुए देशभर में लागू की गयी नोटबंदी, देश की अर्थव्यवस्था और सर्जिकल स्ट्राइक  के अलावा भीड़ द्वारा पीटपीट कर मारे जाने की घटनाओं  जैसे अहम मुद्दो प्रणब दा पर अपनी राय रख सकते हैं.

पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी की यह किताब उनकी आत्मकथा की श्रृंखला की चौथी कड़ी होगी. इस किताब का शीर्षक होगा, “द प्रेसिडेंशियल ईयर्स”.

जानकारों की माने तो इस किताब में प्रणब मुखर्जी संघ के कार्यक्रम का निमन्त्रण स्वीकार करने और वहां दिए गए अपने भाषण का उल्लेख भी कर सकते हैं. इस किताब के माध्यम से प्रणब दा उस सच का खुलासा भी कर सकते हैं जिसके चलते उन्होंने आरएसएस के कार्यक्रम में शामिल होने का न्यौता स्वीकार किया.

इस किताब में देश के बतौर 13वें राष्ट्रपति उनकी जीवन यात्रा और मोदी सरकार के कामकाज का पूरा ब्योरा मिलने की संभावना जताई जा रही है. “द प्रेसिडेंशियल ईयर्स” का प्रकाशन रूपा पब्लिकेशन करेगा.

इससे पहले प्रणब दा की तीन किताबें “द ड्रमैटिक डिकेड”, “द टरबुलेंट ईयर्स” व “द कोएलेशन ईयर्स”) भी रूपा पब्लिकेशन ने ही प्रकाशित की हैं.

उम्मीद जताई जा रही है कि ठीक आम चुनावो से कुछ महीने पहले आने वाली प्रणब दा की चौथी किताब से राजनैतिक हलको में हलचल पैसा हो सकती है तथा कई अनकहे रहस्यों से पर्दा भी उठ सकता है.

अहम बात यह है कि प्रणब दा अपनी इस किताब में आरएसएस को लेकर कोई बात रखते हैं अथवा नही ? फिलहाल इस किताब को लेकर चर्चाएँ ज़ोरों पर हैं.

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