2019: बड़ी डील की तरफ बढ़ रहे हैं कांग्रेस और बसपा 

नई दिल्ली(राजा ज़ैद) । उत्तर प्रदेश में हो रहे दो लोकसभा सीटों के लिए उपचुनाव में भले ही बहुजन समाज पार्टी ने समाजवादी पार्टी के प्रत्याशियों को समर्थन देने का एलान किया है लेकिन सूत्रों से आ रही खबरों में कहा गया है कि कांग्रेस 2019 के लोकसभा चुनाव में महागठबंधन बनने और न बनने, दोनो ही दशाओं को ध्यान में रखकर आगे बढ़ रही है।

यूपीए की चेयरपर्सन सोनिया गांधी ने जहाँ 13 मार्च को तमाम गैर बीजेपी दलो के नेताओं को रात्रि भोज पर आमंत्रित किया है। वहीँ 27 और 28 मार्च को एनसीपी नेता शरद पवार भी विपक्ष के नेताओं के साथ एक बैठक का आयोजन कर रहे हैं। इस बैठक में गैर कोंग्रेसी और गैर बीजेपी दलों को आमंत्रित किया गया है। समझा जाता है कि शरद पवार द्वारा बुलाई गयी बैठक में तीसरे मोर्चे के गठन को लेकर चर्चा की जायेगी।

तीसरे मोर्चे की आहट सुनने के बाद कांग्रेस ने अपनी रणनीति में बदलाव करते हुए महागठबंधन और बिना महागठबंधन दोनो तरह से अपनी तैयारियां शुरू कर दी हैं।

सूत्रों की माने तो कांग्रेस की पहली कोशिश अधिक से अधिक विपक्षी दलों को जोड़कर राष्ट्रीय स्तर पर महागठबंधन बनाने की होगी लेकिन यदि तीसरा मोर्चा जैसा कोई विकल्प विपक्ष की एकता में वाधा बनता है तो उस स्थति से निपटने के लिए कांग्रेस कुछ क्षत्रीय दलों को लेकर भी अपनी भविष्य की रणनीति तैयार कर रही है।

सूत्रों के मुताबिक राजस्थान, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ में इस वर्ष विधानसभा चुनाव होने जा रहे हैं। जिसे ध्यान में रखकर कांग्रेस और बहुजन समाज पार्टी के एक बड़ी डील की तरफ बढ़ रहे हैं। हाल ही में बसपा प्रमुख मायावती ने इस आशय का संकेत देते हुए कहा था कि यदि कांग्रेस को मध्य प्रदेश में हमारा समर्थन चाहिए तो उसे राज्य सभा में हमारे उम्मीदवार का समर्थन करना होगा। बसपा सुप्रीमो ने जैसा कहा था हुआ भी ठीक वैसा ही है।

आज उत्तर प्रदेश में कांग्रेस ने राज्य सभा चुनाव में बहुजन समाज पार्टी के उम्मीदवार के समर्थन का एलान कर मायावती की पहली शर्त मान ली है। सूत्रों के मुताबिक यदि 2019 के लोकसभा चुनाव से पहले विपक्षी दलों का महागठबंधन नहीं बन पाया तो कांग्रेस उस स्थति में बहुजन समाज पार्टी को साथ लेकर चुनाव लड़ना बेहतर मानती है।

उत्तर प्रदेश में हुए विधानसभा चुनावो में कांग्रेस ने समाजवादी पार्टी के साथ गठबंधन किया था लेकिन उसे इस गठबंधन से नफा नहीं बल्कि बड़ा नुक्सान हुआ। वहीँ दूसरी तरफ कांग्रेस के रणनीतिकारों का मानना है कि राष्ट्रीय स्तर पर देखा जाए तो बसपा का संगठन समाजवादी पार्टी की तुलना में अधिक राज्यों में है।

सूत्रों के मुताबिक 13 मार्च को कांग्रेस नेता सोनिया गांधी द्वारा दिए जा रहे विपक्ष के नेताओं को रात्रि भोज के दौरान 2019 के महागठबधन को लेकर चर्चा होगी। जिसके बाद महागठबंधन को लेकर विपक्षी दलों की एक राय निकलकर सामने आएगी।

महागठबंधन बनाने के लिए विपक्ष के सभी दल सहमत हो जाएँ और एक प्लेटफॉर्म पर आएं इसका संदेह स्वयं यूपीए चेयरपर्सन सोनिया गांधी को भी है। शुक्रवार को सोनिया गांधी ने इंडिया टुडे कॉन्क्लेव में कहा था कि ‘ये हमारी पार्टी समेत सभी पार्टियों के लिए मुश्किल काम है कि राष्ट्रीय स्तर पर मुद्दों को लेकर साथ आएं। कई राज्यों में जमीनी स्तर पर हम इन दलों के विरोधी हैं। यहां तक कि हमारी पार्टी में भी विरोध है,ये मुश्किल काम है।’

सभी विपक्षी दलों को राष्ट्रीय स्तर पर एकजुट करने आ रही अड़चनों का ज़िक्र करते हुए सोनिया गांधी ने कहा कि ‘कई विपक्षी दलों के लिए राष्ट्रीय स्तर पर साथ जुटना मुश्किल काम है क्योंकि राज्यों में ये एक दूसरे के विरोधी हैं। लेकिन हम बड़ी तस्वीर को देखें, अगर हम देश के लिए फिक्र करते हैं तो हमें साथ आना होगा।’

फिलहाल सभी की नज़रें 13 मार्च को सोनिया गांधी द्वारा दिए जा रहे रात्रि भोज पर टिकी हैं। इस रात्रि भोज में हाल में एनडीए से नाता तोड़ने का एलान करने वाली टीडीपी को भी शामिल होने का न्यौता दिया गया है। विपक्षी दलों के नेताओं के लिए आयोजित रात्रि भोज में कौन कौन सी पार्टियों के नेता शामिल होते हैं उससे यह अंदाज़ा लगाया जा सकेगा कि विपक्ष को एकजुट करने की दिशा में कांग्रेस के प्रयास किस हद तक सफल रहे।

ताज़ा हिंदी समाचार और उनसे जुड़े अपडेट हासिल करने के लिए फ्री मोबाइल एप डाउनलोड करें अथवा हमें फेसबुक, ट्विटर या गूगल पर फॉलो करें

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *