2019 आम चुनाव में इन राज्यों में बीजेपी को लग सकता है बड़ा झटका

नई दिल्ली(राजाज़ैद)। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी देश के विभिन्न राज्यों के दौरों में अपनी सभाओं में जिस तरह कांग्रेस पर निशाना साध रहे हैं उससे लगता है कि बीजेपी अब चुनावी मोड़ में आ चुकी है और सम्भावना है कि आम चुनाव समय से एक दो महीने पहले ही करा दिए जाएँ।

आम चुनावो की तैयारी में जुटी भारतीय जनता पार्टी के सामने इस बार कई नई मुश्किलें हैं। इस बार स्थति 2014 जैसी नहीं है बल्कि कई राज्यों में उसके लिए इस बार विपरीत परिस्थतियाँ बनी हैं।

वहीँ 2014 में बीजेपी ने जिस तरह के गठबंधन का जाल बुना था, इस बार उस गठबंधन भी छेद हो चुके हैं। यही कारण है कि कई राज्यों में बीजेपी को अपने ही पुराने सहयोगी दलों से चुनौती का सामना करना पड़ सकता है।

उत्तर प्रदेश:

2014 के लोकसभा चुनाव में बीजेपी ने उत्तर प्रदेश में 72 सीटें जीती थीं लेकिन इस बार पहले जैसे हालात नहीं हैं। 2014 के बाद हुए उपचुनावों में बीजेपी की करारी हार इस बात का सबूत है कि 2014 के आम चुनाव के बाद राज्य में बीजेपी की जनता पर पकड़ ढीली हो गयी है। जानकारों की माने तो यदि राज्य में सभी दल अलग अलग चुनाव लड़ें तो भी बीजेपी फिर से 72 सीटों के आंकड़े तक नहीं पहुँच सकती।

वहीँ मीडिया रिपोर्ट्स को सच माने तो 2019 के लोकसभा चुनाव के लिए जहाँ सपा बसपा के बीच गठबंधन होना तय है वहीँ कांग्रेस, शिवपाल यादव की प्रोग्रेसिव समाजवादी पार्टी के अलावा पीस पार्टी या असदुद्दीन ओवैसी की एआईएमआईएम से गठबंधन को लेकर गंभीरता से प्रयास कर रही है।

ऐसे हालातो में जिस जातिगत समीकरण के फायदे से बीजेपी ने 2014 में 72 सीटें जीती थीं उसी जातिगत समीकरण के पलटने से बीजेपी को केवल उत्तर प्रदेश में ही करीब आधी सीटों का सीधा नुकसान होता दिख रहा है।

मध्य प्रदेश:

2014 के लोकसभा चुनाव में बीजेपी ने मध्य प्रदेश में 29 में से 27 सीटें जीती थीं जबकि कांग्रेस को सिर्फ 02 सीटें मिली थीं। उस समय राज्य में बीजेपी की सरकार थी लेकिन 2019 के आम चुनाव में स्थति बदल चुकी है।

अब राज्य में कांग्रेस की सरकार है और कांग्रेस के विधायकों की तादाद इतनी हो चुकी हैं कि वे राज्य की 29 सीटों में से कम से कम 14 सीटें कांग्रेस की झोली में डाल सकते हैं। ऐसी स्थति में बीजेपी को मध्य प्रदेश में कम से कम 12 से 15 सीटों का सीधा नुकसान हो सकता है।

राजस्थान:

राजस्थान में भी इस बार गणित बदल चूका है। राज्य में अब कांग्रेस की सरकार है। 2014 के लोकसभा चुनाव में बीजेपी ने राजस्थान की सभी 25 सीटें जीती थीं। वहीँ 2009 में जब राज्य में कांग्रेस की सरकार थी तो बीजेपी को मात्र 04 सीटें ही मिली थीं। ऐसे में यह तय माना जा रहा है कि राजस्थान में इस बार कांग्रेस का प्रदर्शन बेहतर होगा वहीँ बीजेपी की सीटें कम होंगी।

2018 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस और बीजेपी को विधानसभाओं में मिले वोटों के आधार पर कहा जा सकता है कि बीजेपी 2019 के आम चुनाव में दस सीटों का आंकड़ा भी मुश्किल से पार कर पाएगी।

महाराष्ट्र:

2014 के लोकसभा चुनाव में महाराष्ट्र में बीजेपी शिवसेना गठबंधन था और इस गठबंधन के चलते बीजेपी को 23 और शिवसेना को 18 सीटें मिली थीं। जबकि एनसीपी और कांग्रेस अलग अलग चुनाव लडे थे इसलिए कांग्रेस को मात्र 02 सीटें और एनसीपी को 04 सीटें मिली थीं।

2019 के आम चुनाव में स्थति इसलिए बदलने की संभावनाएं बन रही हैं क्यों कि कांग्रेस और एनसीपी में गठबंधन तय हो गया है जबकि बीजेपी और शिवसेना के बीच गठबंधन के आसार समाप्ति की तरफ हैं।

चुनाव विशेषको की माने तो यदि महाराष्ट्र में बीजेपी शिवसेना गठबंधन नहीं हुआ तो इसका सीधा नुकसान बीजेपी को होगा। वहीँ यदि शिवसेना बीजेपी में गठबंधन होता है तब भी एनसीपी और कांग्रेस के बीच गठबंधन के चलते इसबार सेकुलर वोटों का विभाजन रुकने से बीजेपी और शिवसेना दोनों की सीटें कम हो सकती हैं।

छत्तीसगढ़:

2009 और 2014 के चुनाव में बीजेपी ने छत्तीसगढ़ में सभी 10 सीटें जीती थीं। दोनों चुनाव में राज्य में बीजेपी की सरकार थी। वहीँ अब राज्य में कांग्रेस की सरकार है। 2018 के विधानसभा चुनाव में बीजेपी की करारी हार का असर लोकसभा चुनाव में भी देखने को मिल सकता है। चुनावी जानकारों के मुताबिक राज्य में इस बार कांग्रेस का प्रदर्शन बेहतर होना तय है।

बिहार:

बिहार की स्थति भी अन्य राज्यों के जैसी है। 2014 के लोकसभा चुनाव में बीजेपी ने 22 सीटें जीती थीं लेकिन इस बार जदयू और एनसीपी से गठबंधन के कारण बीजेपी राज्य की 17 सीटों पर चुनाव लड़ेगी। यानि चुनाव से पहले ही उसे सीधे तौर पर 05 सीटों का नुकसान हो रहा है।

वहीँ दूसरी तरफ राज्य में कांग्रेस, राजद, लोकसमता पार्टी और जीतनराम मांझी की हम के बीच गठबंधन है। ऐसे में बीजेपी के लिए 2014 जैसे परिणामो को दोहराना आसान नहीं होगा।

राज्य में बीजेपी को अपने ही लोगों से मिली चुनौतियों से भी जूझना पड़ेगा। बीजेपी सांसद शत्रुघ्न सिन्हा और कीर्ति आज़ाद राज्य में बीजेपी के लिए बड़ी चुनौती बन सकते हैं।

आंध्रप्रदेश:

2014 के आम चुनाव में बीजेपी और टीडीपी का गठबंधन था। इसलिए दोनों ने मिलकर राज्य में 17 सीटें जीती थीं। लेकिन इस बार स्थति इसलिए भी अलग है क्यों कि टीडीपी अब बीजेपी के साथ नहीं हैं बल्कि वह कांग्रेस के साथ है। इसलिए राज्य में समीकरण इस बार बीजेपी के पक्ष में नहीं हैं।

ऐसी स्थति में राज्य में बड़े फेरबदल से इंकार नहीं किया जा सकता। चुनावी जानकारों की माने तो आंध्र प्रदेश में बीजेपी को बड़ा झटका लग सकता है और संभव है कि राज्य में वह 2019 के आम चुनाव में वाईएसआर कांग्रेस के साथ गठबंधन करे। जानकारों की माने तो राज्य में कांग्रेस टीडीपी अच्छा प्रदर्शन कर सकते हैं।

फ़िलहाल सभी की नज़रें उत्तर प्रदेश पर टिकी हैं। यहाँ विपक्ष के गठबंधन की तस्वीर पर बीजेपी का प्रदर्शन निर्भर करेगा। हालाँकि जानकारों का कहना है कि यदि विपक्षी दलों के बीच गठबंधन नहीं हुआ तब भी बीजेपी अपने 2014 के प्रदर्शन को नहीं दोहरा सकती।

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