हिंदू-मुस्लिम बच्चों को अलग-अलग बैठाने के मामले में शिक्षक निलंबित

नयी दिल्ली। देश की राजधानी दिल्ली में इंसानियत को शर्मसार करने वाली घटना प्रकाश में आयी है। राष्ट्रीय राजधानी के एक प्राथमिक विद्यालय में हिंदू और मुस्लिम छात्रों को अलग-अलग कक्षाओं में बैठाया जा रहा था।

इस घटना के प्रकाश में आने के बाद लेकर उत्तरी दिल्ली नगर निगम (एनडीएमसी) ने स्कूल प्रभारी को निलंबित कर दिया है। वहीं, दिल्ली सरकार ने मामले की जांच के आदेश दिये हैं। मानव संसाधन विकास मंत्रालय ने भी मामले में रिपोर्ट तलब की है।

एनडीएमसी के शिक्षकों के एक वर्ग ने आरोप लगाया है कि वजीराबाद के प्राथमिक स्कूल में हिंदू और मुस्लिम छात्रों को अलग-अलग कक्षाओं में बैठाया जा रहा है। भाजपा शासित एनडीएमसी ने अपनी शुरुआती जांच में आरोपों को सही पाया और स्कूल प्रभारी को निलंबित करने का आदेश दिया।

निगम ने इस घटना की निंदा करते हुए इसे ‘अकल्पनीय’ और ‘अक्षम्य’ करार दिया है। उत्तरी नगर निगम के आयुक्त मधुप व्यास ने कहा, ‘मुझे मेरे अधिकारियों ने आरोपों के बारे में जानकारी दी। हमने आरोपों की जांच करने का फैसला किया और दुर्भाग्य से यह आरोप सही पाये गये। हमने तुरंत प्रभाव से स्कूल के प्रभारी को निलंबित कर दिया है।’

आयुक्त ने घटना को ‘बेतुका’ और ‘अक्षम्य’ बताते हुए कहा कि यह बहुलतावादी समाज की संरचना के खिलाफ है। एनडीएमसी के शिक्षा निदेशक एचके हेम ने बताया कि जुलाई में स्कूल के प्रधानाचार्य का तबादला कर दिया गया था, जिसके बाद शिक्षक सीबी सिंह सेहरावत को स्कूल का प्रभारी बनाया गया था।

उन्होंने बताया कि आरोपों की जांच के लिए बुधवार को तीन सदस्य समिति भेजी गयी थी, आयुक्त ने कहा, ‘हमारी जांच के दौरान, यह पाया गया कि स्कूल प्रभारी ही था। जिसने (छात्रों को) अलग-अलग कक्षाओं में बैठाना शुरू किया। ये बच्चे गरीब पृष्ठभूमि से आते हैं और इस तरह के कृत्यों से उन पर हानिकारक प्रभाव पड़ सकते हैं। हम ऐसी चीजें बर्दाश्त नहीं करेंगे. यह अक्षम्य है।’

इस मामले में दिल्ली बाल संरक्षण आयोग ने एनडीएमसी द्वारा संचालित स्कूल के प्रभारी को नोटिस जारी कर छात्रों को धर्म के आधार पर अलग- अलग बैठाने का कारण पूछा है। आयोग ने कहा कि इस तरह से अलग-अलग बैठाने का प्रभाव बच्चों की समग्र शिक्षा और विकास पर पड़ सकता है। साथ में यह देश के सामाजिक ताने-बाने पर भी नकारात्मक असर डाल सकता है।

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