हरियाणा: खांप पंचायतें हैं खट्टर से नाराज़, बीजेपी को है हिंदुत्व और राष्ट्रवाद से आस

नई दिल्ली। हरियाणा में होने जा रहे विधानसभा चुनाव के लिए बीजेपी चुनावी मोड में आ चुकी है वहीँ कांग्रेस ने प्रदेश नेतृत्व में परिवर्तन कर अपनी चुनावी तैयारियों का श्रीगणेश कर दिया है।

हरियाणा में सत्तारूड बीजेपी ने भले ही लोकसभा चुनाव में बाजी मार ली हो लेकिन विधानसभा चुनाव में उसके लिए राह उतनी आसान नहीं दिखाई देती। हालाँकि बीजेपी सेकुलर वोटों के बंटवारे के सहारे अपनी नैया पार करने की कोशिश में रहेगी।

हरियाणा में जहाँ एक तरफ गैर बीजेपी दलों के बीच मतों का विभाजन बीजेपी के लिए फायदे का सौदा है वहीँ हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर से खांप पंचायतो की नाराज़गी बीजेपी को कई इलाको में भारी भी पड़ सकती है।

जानकारों की माने तो भारतीय जनता पार्टी राष्ट्रवाद, हिंदुत्व और सेकुलर मतो के विभाजन के सहारे चुनाव लड़ने की तैयारी कर रही है। वहीं दूसरी तरफ कांग्रेस ने दलित समुदाय से ताल्लुक रखने वाली कुमार शैलजा को प्रदेश अध्यक्ष बनाकर साफ़ सन्देश दे दिया है कि उसकी निगाहें हरियाणा के 21 फीसदी दलित मतदाताओं पर टिकी हैं।

जानकारों के मुताबिक दिल्ली से सटे हरियाणा में विधानसभा चुनाव में स्थानीय मुद्दों के अलावा राष्ट्रीय मुद्दे भी सिर चढ़कर बोलते हैं। इसलिए बीजेपी को बेरोज़गारी, चौपट अर्थव्यवस्था, महंगाई जैसे मुद्दों का भी सामना करना पड़ेगा। वहीँ किसानो की नाराज़गी का मुद्दा भी बीजेपी के लिए चिंता पैदा करने वाला है।

वहीँ स्थानीय मुद्दों में खट्टर सरकार के दौरान हुईं दलितों के शोषण की घटनाएं, ऑटो सेक्टर में आयी मंदी के बाद हरियाणा के गुड़गांव स्थित मारुती सुजुकी में अस्थाई कर्मचारियों की छटनी, महिला सुरक्षा और बढ़ते अपराध जैसे मुद्दे चुनाव में बीजेपी के लिए मुश्किलें पैदा कर सकते हैं।

हालाँकि अभी विधानसभा चुनावो की अधिसूचना जारी नहीं हुई है और चुनावो में खासा समय बाकी है लेकिन जैसे जैसे चुनाव करीब आएगा राज्य की बीजेपी सरकार से जनता की नाराज़गी और मुद्दे दोनों उभर कर सामने आ जायेंगे।

कांग्रेस में हुड्डा को नहीं कोई शिकायत:

हरियाणा कांग्रेस में लम्बे समय से चल रही गुटबंदी को फिलहाल कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी और हरियाणा के प्रभारी गुलामनबी आज़ाद ने ब्रेक लगा दिए हैं। पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा और प्रदेश अध्यक्ष अशोक तंवर के बीच चल रहे शीत युद्ध को समाप्त करने के लिए अशोक तंवर को अपने पद की आहुति देनी पड़ी।

अब प्रदेश में नेतृत्व परिवर्तन कर कुमारी शैलजा को अध्यक्ष बनाये जाने के बाद हुड्डा के तेवर नरम पड़ गए हैं। उन्होंने मीडिया से कहा कि मुझे पार्टी हाईकमान जो भी ज़िम्मेदारी देगा, मैं उसका पूरी ज़िम्मेदारी से निर्वाह करूँगा। मैं चाहता हूँ कि कांग्रेस पूर्ण बहुमत के साथ राज्य की सत्ता में वापसी करे।

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