हत्या के आरोपी हिन्दू सेना के तीन सदस्यों की ज़मानत रद्द, सुप्रीमकोर्ट ने की अहम टिप्पणी

नई दिल्ली। सुप्रीमकोर्ट ने पुणे में मोहसिन शेख नामक शख्स की हत्या के आरोपी हिंदू राष्ट्र सेना के तीन सदस्यों की ज़मानत ख़ारिज कर दी है ।

मामला जून 2014 का है जब हिंदू राष्ट्र सेना के लोग एक बैठक में हिस्सा लेकर आ रहे थे और रास्ते में उन्हें हरी कमीज पहने मोहसिन मिल गया। मोहसिन की दाढ़ी भी थी।तभी हिन्दू सेना के लोगों ने हॉकी स्टिक से मोहसिन और उसके एक दोस्त पर हमला कर दिया था और बाद में मोहिसन की मौत हो गई।

इस मामले में बॉम्बे हाईकोर्ट ने तीन आरोपियों को जमानत दे दी थी। हाईकोर्ट के इस फैसले को मोहसिन के एक रिश्तेदार ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी। शीर्ष अदालत ने तीनों की जमानत खारिज करते हुए समर्पण करने के लिए कहा है।

सुप्रीमकोर्ट ने अपनी अहम टिप्पणी में कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि अलग धार्मिक पहचान किसी व्यक्ति पर हमला करने या उसकी हत्या करने का ‘लाइसेंस’ नहीं दे देती है। शीर्ष अदालत ने सभी अदालतों से कहा कि वे ऐसा कोई आदेश पारित न करें जिसमें किसी समुदाय के समर्थन या विरोध का स्वर दिखता हो।

बॉम्बे हाईकोर्ट द्वारा आरोपियों को ज़मानत दिए जाने पर यह तर्क दिया गया था कि कि पीड़ित का दोष सिर्फ यह था कि वह दूसरे धर्म का था। सुप्रीमकोर्ट ने हाईकोर्ट के इस तर्क पर कड़ी आपत्ति जताते हुए शीर्ष अदालत ने तीनों आरोपियों की जमानत रद्द कर दी है।

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बॉम्बे हाईकोर्ट के तर्क पर टिप्पणी करते हुए न्यायमूर्ति एसए बोबडे और न्यायमूर्ति एल नागेश्वर राव की पीठ ने कहा कि सभी अदालतों को हमेशा ध्यान रखना चाहिए कि भारत में विभिन्न समुदाय और मान्यता वाले लोग रहते हैं। ऐसे में अदालतों का यह कर्तव्य है कि वह विभिन्न समुदायों या समूहों के अधिकारों पर निष्पक्ष तरीके से निर्णय ले।

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