हंग पार्लियामेंट के बने हालात तो मायावती होंगी पीएम पद की प्रमुख दावेदार

नई दिल्ली(राजा ज़ैद)। देश में जिस तरह का माहौल चल रहा है उसे देखकर इस बात से इंकार नहीं किया जा सकता कि 2019 के लोकसभा चुनावो के परिणाम भी कर्नाटक विधानसभा चुनावो जैसे हों।

जैसे कि कयास लगाए जा रहे हैं कि अगला आम चुनाव एकजुट सम्पूर्ण विपक्ष और एनडीए के बीच होगा। अभी हाल ही में सीडीएस द्वारा किये गए सर्वेक्षण में जो तस्वीर सामने आयी है यदि उसे सच मान लिया जाए तो एनडीए को पूर्ण बहुमत मिलना सम्भव नहीं लगता। ऐसे में जोड़तोड़ की राजनीति होना तय है।

यदि त्रिशंकु संसद की स्थति पैसा होती है तो कांग्रेस कभी नहीं चाहेगी कि राहुल गांधी देश के प्रधानमंत्री बने। जानकारों की माने तो बिना अपने बूते बहुमत के कांग्रेस अपने कदम वापस खींच कर किसी और का नाम प्रधानमंत्री पद के लिए आगे बढ़ा सकती है।

जानकारों की माने तो पिछले कुछ दिनों में कांग्रेस और बसपा के बीच राजनैतिक दूरियां कम हुई हैं। जिसकी एक बड़ी झलक कर्नाटक में कुमार स्वामी के शपथ ग्रहण समारोह के दौरान यूपीए चेयरपर्सन सोनिया गांधी और बसपा सुप्रीमो मायावती की खींची गयी एक तस्वीर में उभर कर सामने आयी है।

इस तस्वीर में सोनिया गांधी और मायावती एक दूसरे को स्नेहवत तरीके से मिल रही हैं। इतना ही नहीं इस कार्यक्रम में कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने खासतौर पर बसपा सुप्रीमो मायावती से बातचीत भी की थी।

जानकारों के अनुसार सोनिया और मायावती कोई इस तस्वीर के दो मायने हो सकते हैं। पहले कयास के अनुसार उत्तर प्रदेश में सपा सुप्रीमो मुलायम सिंह यादव द्वारा हाल ही में कांग्रेस की औकात दो सीटों की बताने से जुड़ा है। सम्भवतः कांग्रेस को इस बात का अंदाजा हो चूका है कि लोकसभा चुनाव में उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी अधिक से अधिक सीटें मांगेगी और कांग्रेस को सात से दस सीटें ही देने पर सहमत होगी।

जानकारों के अनुसार कांग्रेस ने समाजवादी पार्टी को अलग थलग करने के लिए पहले ही मायावती का दामन थाम लिया है और लोकसभा चुनाव में सपा को किनारे पर रखकर कांग्रेस बसपा और राष्ट्रीय लोकदल और शारद यादव के लोकतांत्रित जनता दल से गठबंधन कर चुनाव लड़ सकती है।

जानकारों की माने तो कांग्रेस उत्तर प्रदेश की अस्सी सीटों में से मायावती की बहुजन समाज पार्टी को 30 तथा राष्ट्रीय लोकदल और लोकतान्त्रिक जनता दल को उत्तर प्रदेश की दस दस लोकसभा सीटें देकर खुश कर सकती है तथा शेष रही 30 सीटों पर अपने उम्मीदवार उतार सकती है।

जानकारों की माने तो समाजवादी पार्टी के यादव मतदाताओं में सेंध लगाने के लिए शरद यादव बड़े हथियार के तौर पर काम कर सकते हैं। वे पहले यादव बाहुल्य बदायूं से भी सांसद रहे हैं और उत्तर प्रदेश के यादव बाहुल्य इलाको में उनकी आज भी अच्छी पकड़ है।

वहीँ राष्ट्रीय स्तर पर कांग्रेस मायावती की बहुजन समाज पार्टी को पंजाब, मध्य प्रदेश, हरियाणा, कर्नाटक, छत्तीसगढ़ सहित कुछ अन्य राज्यों में कुछ कुछ सीटें देकर उसका मान बढ़ा सकती है।

जानकारों की माने तो त्रिशंकु संसद की स्थति में ममता बनर्जी, मायावती और टीडीपी नेता चंद्रबाबू के नाम प्रधानमंत्री पद के लिए उभर कर आ सकते हैं। इन तीनो नामो में आपस में कहीं न कहीं पेंच फंसा है। कांग्रेस कभी नहीं चाहेगी कि चंद्रबाबू नायडू प्रधानमंत्री बने। वहीँ ममता के नाम पर कम्युनिस्ट उछल सकते हैं। वे ममता बनर्जी को प्रधानमंत्री के तौर पर स्वीकार नहीं करेंगे।

ऐसे हालातो में मायावती प्रधानमंत्री पद की सबसे सशक्त उम्मीदवार हो सकती हैं। बसपा सुप्रीमो मायावती के नाम पर किसी दल को कोई आपत्ति नहीं होगी वहीँ कांग्रेस एक दलित को देश का पीएम बनाकर एक बड़ा सन्देश दे सकती है।

हालाँकि अभी 2019 के चुनावो में खासा समय बाकी है लेकिन फ़िलहाल इतना तय है कि हाल ही में सीडीएस के जो आंकड़े सामने आये हैं उन्हें देखकर साफ़ तौर पर कहा जा सकता है कि 2019 में त्रिशंकु लोकसभा भी बन सकती है।

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