हंगामा है क्यों बरपा, सच्चाई ही तो कह दी है: बरेली के जिलाधिकारी ने गलत तो कुछ नहीं कहा

नई दिल्ली(राजा ज़ैद)। बरेली के जिलाधिकारी आरवी सिंह की जिस पोस्ट को लेकर कथित राष्ट्रवादी उन पर हमले कर रहे हैं उस पोस्ट में ऐसा कुछ भी नहीं जो उन्हें कटघरे में खड़ा किया जा सके। सही मायनो में डीएम आरवी सिंह ने अपने पोस्ट में जिस सच्चाई को बयान किया है उसे देश को स्वीकार करना चाहिए।

देश में पहले भी सांप्रदायिक दंगे होते रहे हैं लेकिन पिछले कुछ वर्षो में देखने में आया है कि दंगो पर राजनीति करने की कोशिशों के तहत एक विशेष राजनैतिक दल के नेता तथ्यों को तोड़ मरोड़ कर पेश कर रहे हैं।

उत्तर प्रदेश के डीजीपी कहते हैं कि तिरंगा यात्रा निकालने के लिए किसी पुलिस अनुमति की आवश्यकता नहीं है जबकि कानून कहता है कि हर उस विशेष परिस्थति में अनुमति लेने की आवश्यकता है जिस से शान्ति में खलल पड़ने की उम्मीद हो। कासगंज में जो कुछ हुआ उसके लिए कानून की भी उतनी ही ज़िम्मेदारी है जितनी की यात्रा निकालने वालो की।

तिरंगा यात्रा निकलने की पुलिस को जानकारी होने के बावजूद पुलिस ने आयोजकों से तिरंगा यात्रा का रूट क्यों नहीं माँगा था। यदि पुलिस को रूट मैप दिया गया था तो पुलिस ने संवेदनशील इलाको में तिरंगा यात्रा को जाने से क्यों नहीं रोका तथा तिरंगा यात्रा के साथ पर्याप्त मात्रा में पुलिस फ़ोर्स क्यों नहीं था। ये कुछ ऐसा सवाल हैं जो न सिर्फ प्रशासन बल्कि तिरंगा यात्रा के आयोजकों की नीयत पर सवाल पैदा करते हैं।

बरेली के डीएम ने अपने फेसबुक पोस्ट में दो सवाल उठाये तो बीजेपी नेताओं के दिमाग से धुआं उठने लगा। डीएम आरवी सिंह ने पहला सवाल पूर्व में बरेली में हुए दंगे का हवाला देकर उठाया। उन्होंने कहा कि ‘अजीब रिवाज बन गया है। मुस्लिम मोहल्लों में जुलूस ले जाओ और पाकिस्तान मुर्दाबाद के नारे लगाओ। क्यों भाई वो पाकिस्तानी हैं क्या? यही यहां बरेली के खैलम गांव में हुआ था, फिर पथराव हुआ, मुकदमे लिखे गए…’

सवाल बड़ा जायज है। जो मुसलमान इस देश में रह रहे हैं। उनके घरो के सामने जाकर आप पाकिस्तानी कैसे कह सकते हैं ? भारतीय मुसलमानो को पाकिस्तान का नाम लेकर पुकारा जाना और हर बार उनकी देशभक्ति पर सवाल खड़े करना एक फैशन नहीं तो क्या है ?

वहीँ बरेली के डीएम आरवी सिंह ने अपने फेसबुक पोस्ट में दूसरा सवाल उठाया कि ‘चीन तो बड़ा दुश्मन है, तिरंगा लेकर चीन मुर्दाबाद क्यों नहीं कहते?’ बरेली के जिलाधिकारी के दोनो सवाल उन लोगों के लिए आइना हैं जो संप्रदाय की राजनीति करते रहे हैं।

यही कारण है कि आरवी सिंह के फेसबुक पोस्ट के बाद उनकी फेसबुक टाइम लाइन पर कथित राष्टवादियों ने उन्हें पाकिस्तान भेजने की धमकियाँ तक दे डालीं। बात यहीं खत्म नहीं हुई, देर शाम तक आरवी सिंह को अपने फेसबुक पोस्ट डिलीट कर माफ़ी मांगनी पड़ी और लिखना पड़ा कि हम सबका डीएनए तो एक ही है।

सरकार और नेताओं के दबाव में भले ही जिलाधिकारी आरवी सिंह ने अपने फेसबुक टाइम लाइन से अपने पोस्ट डिलीट कर दिए हों लेकिन एक उच्च प्रशासनिक अधिकारी के दिल से निकली आवाज़ देश में वर्षो तक गूंजती रहेगी। आरवी सिंह ने जो कुछ कहा वह शासन और प्रशासन से जुड़े अन्य लोगों के लिए एक बड़ा सन्देश है।

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