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सोच का घटिया स्तर: रूह अफ़ज़ा मुसलमान है, इसे न पीना

नई दिल्ली। मुसलमानो के पवित्र माह रमजान में कुछ लोग हमदर्द के शर्बत रूह अफ़ज़ा में साम्प्रदायिकता का स्वाद ढूंढ रहे हैं। सोशल मीडिया पर कुछ लोग हमदर्द के शर्बत रूह अफ़ज़ा को मुसलमान होने का सर्टिफिकेट बाँट रहे हैं।

इतना ही नहीं सोशल मीडिया पर रूह अफ़ज़ा हो मुसलमान घोषित कर हिन्दुओं से अपील की जा रही है कि गर्मी में नीबू पानी पी लेना लेकिन रूह अफ़ज़ा मत पीना, क्यों कि ये मुसलमान है। इसे हमदर्द कम्पनी बनाती है जिसका मालिक मुस्लिम है। इसकी विक्री से मुसलमानो को फायदा होता है।

ट्विटर पर इस बात को आगे बढ़ाते हुए एमसी गौतम नामक एक व्यक्ति ने ट्वीट किया है, “फ्रेश जूस ले लो भैया, रूह अफजा मुसलमान है।” वहीँ कुछ लोग इस तरह के संदेश पोस्ट करने वालो की खिंचाई भी कर रहे हैं।

टेम्पेस्ट नामक एक यूजर ने लिखा कि रूह अफज़ा 1906 से बाज़ार में बिक रहा है, लेकिन उसका धर्म जानने में 111 साल लग गए। खैर इस नफ़रत में भाजपा की राजनीति का कोई हाथ नहीं है,शायद।

बड़े आश्चर्य और शर्मिंदगी की बात है कि कुछ लोगों की मानसिकता इतने घटिया स्तर तक पहुँच गयी है कि वे खाने पीने की चीज़ को भी सांप्रदायिक चश्मे से देख रहे हैं। गौरतलब है कि हमदर्द की कई औषधियों की मांग आज भी भारत में अच्छी-खासी है। वहीं रूह अफजा का जुड़ाव भारतीय व्रत-त्यौहारों से है इसलिए इसे सांप्रदायिक रंग देने की कोशिश की जा रही है। बहरहाल इस मौसम में सांप्रदायिकता की नहीं बल्कि गला तर करने वाली शरबत की जरूरत ज्यादा है।

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