सुप्रीम कोर्ट ने चांद तारे वाले हरे झंडे को बैन करने पर केंद्र सरकार से मांगा जवाब

नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने चांद सितारे वाले हरे इस्लामिक झंडे पर रोक लगाने की याचिका पर केंद्र सरकार से जवाब मांगा है। उत्‍तर प्रदेश शिया सेन्ट्रल वक्फ बोर्ड के अध्यक्ष वसीम रिजवी ने याचिका दायर कर इस झंडे पर भारत में बैन लगाने की मांग की थी।

रिजवी ने 17 अप्रैल को दायर याचिका में कहा था कि सितारे वाला हरा झंडा पाकिस्‍तान और वहां की एक राजनीतिक पार्टी के झंड़े से मिलता-जुलता है। 1906 में इस पार्टी की स्थापना नवाज वकार उल-मलिक और मोहम्मद अली जिन्ना ने ढाका में की थी।

याचिका में कहा गया है कि भारत और पाकिस्तान के अलग हो जाने के बाद यह झंडा मुस्लिम लीग के साथ पाकिस्तान चला गया। इस झंडे को पाकिस्तान का झंडा कहकर भारत में फहराया जा रहा है। इसे बैन कर दिया जाना चाहिए।

सोमवार को सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई करते हुए केंद्र सरकार से कहा कि वह चांद-सितारे वाले हरे झंडे को बैन करने की याचिका पर अपना जवाब दाखिल करे कि सरकार इस बारे में क्या सोचती है।

जस्टिस ए के सीकरी की अध्यक्षता वाली दो जजों की पीठ ने अतिरिक्त सॉलिसीटर जनरल तुषार मेहता को कहा कि केंद्र सरकार की राय बताएं। इसके बाद ही याचिका पर कोई फैसला सुनाया जा सकता है।

वहीँ दूसरी तरफ इस्लाम के जानकारों के अनुसार वसीम रिज़वी जिस चाँद तारे वाले हरे झंडे पर पाबन्दी लगाने की मांग कर रहे हैं वह इस्लामिक झंडा है और यह पाकिस्तान के राष्ट्रीय झंडे से पूरी तरह मेल नहीं खाता। जानकारों के अनुसार पाकिस्तान के झंडे में सफ़ेद पट्टी भी जुडी हुई है जबकि इस्लामिक झंडा पूरी तरह हरे रंग का है।

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