सुप्रीमकोर्ट में सुन्नी वक्फ बोर्ड: बाबरी मस्जिद को हिन्दू तालिबान ने नष्ट किया

नई दिल्ली। अयोध्या विवाद पर सुप्रीमकोर्ट में सुनवाई के दौरान सुन्नी वक्फ बोर्ड के वकील ने कहा कि चूँकि इस मामले से शिया वक़्फ़ बोर्ड का कोई लेना देना नहीं है इसलिए शिया वक़्फ़ बोर्ड को इस मामले में बोलने का भी कोई हक़ नहीं हैं।

शुक्रवार को सुनवाई के दौरान सुन्नी वक़्फ़ बोर्ड के वकील राजीव धवन ने कहा कि जिस तरह तालिबान ने बामियान को नष्ट कर दिया था, ठीक उसी तरह हिंदू तालिबान ने बाबरी मस्जिद को नष्ट कर दिया।

इससे पहली तारीख पर वरिष्ठ वकील राजीव धवन ने अयोध्या मामले की सुप्रीमकोर्ट में सुनवाई के दौरान कहा था कि इस्लाम में मस्जिद की अहमियत है और यह सामूहिकता वाला मजहब है।

उन्होंने कोर्ट से कहा था कि इस्लाम में नमाज कहीं भी अदा की जा सकती है। सामूहिक नमाज मस्जिद में होती है ,मस्जिद कोई मजाक के लिए नहीं बनायी गयी थी, हजारों लोग यहां नमाज अदा करते हैं।

इससे पहले यूपी सेन्ट्रल शिया वक़्फ़ बोर्ड के अध्यक्ष वसीम रिज़वी ने कहा था कि अयोध्या में उस जबह पर कभी मस्जिद नहीं थी और वहां कभी मस्जिद नहीं हो सकती है। यह भगवान राम का जन्मस्थान है और वहां केवल राम मंदिर बनाया जाएगा. बाबर से सहानुभूति रखने वालों की नियति में हार है।

गौरतलब है कि शिया वक्फ बोर्ड ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की थी कि वो इस विवाद को शांति से सुलझाना चाहते हैं। शिया वक्फ बोर्ड ने कहा था कि बाबरी मस्जिद का संरक्षक शिया है साथ ही सुन्नी वक्फ बोर्ड या अन्‍य कोई भारत में मुसलमानों का प्रतिनिधित्‍व नहीं करते।

आपको बता दें कि यह विवाद लगभग 68 वर्षों से कोर्ट में है। इस मामले से जुड़े 9,000 पन्नों के दस्तावेज और 90,000 पन्नों में दर्ज गवाहियां पाली, फारसी, संस्कृत और अरबी सहित विभिन्न भाषाओं में दर्ज हैं, जिस पर सुन्नी वक्फ बोर्ड ने कोर्ट से इन दस्तावेजों को अनुवाद कराने की मांग की थी।

फ्लेशबैक :

2010 में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने इस मामले पर फैसला देते हुए 2.77 एकड़ की विवादित जमीन का एक तिहाई हिस्सा हिंदू, एक तिहाई मुस्लिम और एक तिहाई राम लला को दिया था। हाईकोर्ट ने संविधान पीठ के 1994 के फैसले पर भरोसा जताया और हिंदुओं के अधिकार को मान्यता दी।

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