सुप्रीमकोर्ट ने कहा ‘आपत्तिजनक ट्वीट को रिट्वीट करना भी अपराध’

नई दिल्ली। सुप्रीमकोर्ट ने कहा है कि बिना सोचे समझे या जान बूझकर किसी भी आपत्तिजनक या अपमानजनक ट्वीट मैसेज को रिट्वीट करना भी अपराध हो सकता है। अगर कोई उसके खिलाफ मानहानि का मुकदमा दाख़िल कर दे तो।

कोर्ट ने यह टिप्पणी आप नेता दीपक बाजपेयी की याचिका खारिज करते हुए की जिसमे कहा गया था कि उन्होंने डीडीसीए मामले में दलील दी थी कि उन्होंने कोई ट्वीट नहीं किया बल्कि एक ट्वीट को रिट्वीट किया था।

सुप्रीम कोर्ट के इस आदेश के बाद अरुण जेटली की ओर से आप नेता दीपक बाजपेयी सहित पांच नेताओं के खिलाफ आपराधिक मानहानि का ममला चलता रहेगा।

याचिका में यह भी कहा गया था कि पटियाला हाउस कोर्ट के समन को रद्द कर दिया जाए। दीपक वाजपेयी की दलील थी कि वो दिल्ली के रहने वाले नहीं हैं, वो तो यूपी के निवासी हैं। कानून के मुताबिक अपने क्षेत्राधिकार से बाहर कोर्ट को समन भेजने से पहले जांच करनी होती है। पटियाला हाउस कोर्ट ने ये सब कवायद नहीं की, इसलिए समन रद्द किया जाए।

अरुण जेटली के आपराधिक मानहानि के मामले में दीपक बाजपेयी पहले आरोपी नहीं हैं, जिन्होंने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। इनसे पहले सुप्रीम कोर्ट ने आप प्रवक्ता राघव चड्ढा की याचिका भी खारिज कर दी थी। चड्ढा ने कहा था कि उन्होंने सिर्फ केजरीवाल के ट्वीट को रिट्वीट किया था, लिहाज़ा ये मानहानि का मामला ही नहीं बनता।

गौरतलब है कि डीडीसीए में भ्रष्टाचार का मुद्दा उठाते हुए वित्त मंत्री अरुण जेटली पर गंभीर आरोप लगाए गए थे। जेटली ने इस मामले में अरविंद केजरीवाल, संजय सिंह, आशुतोष, राघव चड्ढा और दीपक बाजपेयी को आपराधिक मानहानि का आरोपी बनाते हुए मुकदमा दायर किया था।

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