सुप्रीमकोर्ट के जजों द्वारा सवाल उठाये जाने पर गर्माया मामला, पढ़िए- किसने क्या कहा

नई दिल्ली। सुप्रीमकोर्ट के चार जजों द्वारा चीफ जस्टिस को लेकर मीडिया में उठाये गए सवालो के बाद देश में एक नया मुद्दा पैदा हो गया है। भारत के इतिहास में यह पहला अवसर है जब सुप्रीमकोर्ट के जजों ने सार्वजनिक रूप से मीडिया के समक्ष सब कुछ ठीक तरह से न चलने की बात को स्वीकारा है।

जानकारों की माने तो ये एक गंभीर मामला है। जब न्याय पालिका में बैठे लोग ही प्रशासनिक काम से संतुष्ट नहीं है तो फिर न्याय की आस लगाने वाले यदि कोई सवाल उठायें तो इंकार नहीं किया जा सकता।

सुप्रीमकोर्ट के चार जजों ने आज मीडिया से जो कुछ कहा उसके बाद देश की सियासत गर्मा गयी है। हालाँकि यह सियासत से जुड़ा मुद्दा नहीं है लेकिन बड़ा सवाल मोदी सरकार पर उठ रहा है कि न्याय पालिका में क्या ऐसी वजह हैं जो सरकार छिपाती आ रही है।

कांग्रेस नेता और वरिष्ठ अधिवक्ता सलमान खुर्शीद ने कहा कि “ये सब सुनकर चिंता होती है। लेकिन साथ ही साथ मैं उम्मीद करता हूं कि वो लोग आपस में बैठकर इसका कोई समाधान निकालेंगे। ये कोई ऐसा मुद्दा नहीं है जिससे कोर्ट का कोई नुकसान होना चाहिए।

वरिष्ठ वक़ील इंदिरा जयसिंह ने कहा कि आज का दिन ऐतिहासिक है। ख़ुशी की बात है की जजों ने खुलकर इस मुद्दे पर बात की. लोगों को ये जानना ज़रूरी था कि कोर्ट में क्या चल रहा है और आगे इस पर सीनियर जजों को खुलकर इस पर बात करनी ही होगी।

बीजेपी सांसद सुब्रमण्यम स्वामी ने कहा कि हम उनकी आलोचना नहीं कर सकते है। . ये चारों ऐसे लोग जिन्होंने अपने इस करियर के लिए बहुत कुछ गंवाया है। हमें उनका सम्मान करना चाहिए। पीएम को ये सुनिश्चित करना चाहिए कि ये चारों जज और चीफ जस्टिस इस मुद्दे पर एकमत हो जाएं।

स्वराज अभियान के नेता और वकील प्रशांत भूषण ने कहा कि किसी को ये इस स्थिति को सामने लाना ही पड़ता कि चीफ जस्टिस बहुत ही बुद्धिमानी से अपने पावर का इस्तेमाल कर रहे हैं, इसलिए ये बेमिसाल कदम है।

वरिष्ठ वकील उज्जवल निकम ने कहा कि आज का प्रेस कॉन्फ्रेंस एक गलत मिसाल साबित हो सकता है। ये जुडिशियरी के इतिहास का काला दिन की तरह है। इसके बाद हर कोई न्यायिक आदेश को संदेह की नज़र से देखेंगे. हर फैसले पर सवाल उठाए जाएँगे।

प्रेस कॉन्फ्रेंस में जजों ने क्या कहा था:

आज सुप्रीम कोर्ट के चार जस्टिस पहली बार मीडिया के सामने आए। इन जजों में जस्टिस चेलामेश्वर, जस्टिस रंजन गोगाई, जस्टिस मदन भीमराव और जस्टिस कुरियन जोसेफ शामिल हैं। जजों ने मीडिया को शुक्रिया भी कहा, साथ ही मीडिया के समक्ष आने का कारण भी बताया।

उन्‍होंने कहा कि किसी भी देश के कानून के इतिहास ये बहुत बड़ा दिन है जब सुप्रीमकोट उन्‍होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट का प्राशासनिक कार्य ठीक से नहीं हो रहा है।

जस्टिस जे. चलेमेश्वर ने कहा कि हम चारों मीडिया का शुक्रिया अदा करना चाहते हैं। यह किसी भी देश के इतिहास में अभूतपूर्व घटना है क्‍योंकि हमें यह ब्रीफिंग करने के लिए मजबूर होना पड़ा है। उन्‍होंने कहा कि हमने ये प्रेस कॉन्‍फ्रेंस इसलिए की ताकि हमें कोई ये न कहे हमने आत्मा बेच दी।

उन्‍होंने कहा कि SC में बहुत कुछ ऐसा हुआ, जो नहीं होना चाहिए था. हमें लगा, हमारी देश के प्रति जवाबदेही है और हमने CJI को मनाने की कोशिश की, लेकिन हमारे प्रयास नाकाम रहे अगर संस्थान को नहीं बचाया गया, लोकतंत्र खत्‍म हो जाएगा।

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