सिर्फ दिग्विजय सिंह जानते हैं कहाँ कहाँ चलाना है शिवराज पर तीर

नई दिल्ली(राजाज़ैद)। मध्य प्रदेश में विधानसभा चुनावो की तैयारी में जुटी कांग्रेस को आज भी पार्टी के कद्दावर नेता और पूर्व सीएम दिग्विजय सिंह के सहारे की दरकार है। हालाँकि कांग्रेस आलाकमान ने दिग्विजय सिंह को कई अहम जिम्मेदारियों से मुक्ति दे दी है इसके बावजूद मध्यप्रदेश में आज भी पार्टी बहुत हद तक दिग्विजय सिंह पर निर्भर है।

दिग्विजय सिंह कांग्रेस के उन सिपाहियों में से एक माने जाते हैं जिन्होंने ख़राब समय में भी कांग्रेस का झंडा नही छोड़ा और वे संघ और बीजेपी पर लगातार हमलावर रहते हैं। यही कारण है कि दिग्विजय सिंह की पार्टी आलाकमान की नजरो में एक अलग अहमियत है।

सूत्रों की माने तो मध्य प्रदेश में कमलनाथ को कांग्रेस का प्रदेश अध्यक्ष बनवाने में दिग्विजय सिंह की अहम भूमिका है। सूत्रों के मुताबिक प्रदेश में नेतृत्व परिवर्तन पर निर्णय कई दिनों तक इसलिए पेंडिंग रखा गया क्यों कि उस समय दिग्विजय सिंह नर्मदा यात्रा पर थे।

पार्टी सूत्रों के मुताबिक प्रदेश में नेतृत्व परिवर्तन को लेकर पार्टी आलाकमान ने दिग्विजय सिंह से राय भी मांगी थी जिसके बाद ही कमलनाथ को प्रदेश अध्यक्ष बनाये जाने की घोषणा की गयी।

बतौर गोवा का प्रभारी रहते हुए दिग्विजय सिंह भले ही गोवा में कांग्रेस की सरकार नही बनवा पाए हों लेकिन उत्तर प्रदेश का प्रभारी रहते हुए वर्ष 2012 के विधानसभा चुनावो में दिग्विजय सिंह ने कांग्रेस के लिए संजीवनी का काम किया था। उस समय उनकी और कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी की जुगलबंदी से विपक्ष के भी पसीने छूट गए थे और एक समय ऐसा लगता था कि कांग्रेस किंग मेकर की भूमिका में खड़ी है।

बता दें कि कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह के प्रदेश का प्रभारी रहते हुए उत्तर प्रदेश में 2012 के विधानसभा चुनावो में कांग्रेस ने कुल 28 सीटें जीती थीं। जबकि 2017 के विधानसभा चुनावो में उसकी संख्या सिमट कर 07 रह गयी है।

आज दिग्विजय सिंह गांधी परिवार की तीसरी पीढ़ी से जुड़े हैं। उन्होंने इंदिरा गांधी, राजीव गांधी, सोनिया गांधी के नेतृत्व में पार्टी को अपनी सेवा दी और अब राहुल गांधी के अध्यक्ष रहते हुए भी पार्टी को अपनी सेवाएं दे रहे हैं।

क्यों अहम हैं दिग्विजय सिंह :

राजनैतिक समीक्षकों की माने तो दिग्विजय सिंह के अनुभव और उनके जनाधार से मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह खासे परेशान रहते हैं। जानकारों के अनुसार दिग्विजय सिंह जानते हैं कि यदि मध्य प्रदेश में चुनाव जीतना है तो शिवराज सिंह पर कहाँ कहाँ तीर चलाने हैं।

दिग्विजय सिंह 1971 से मध्य प्रदेश की राजनीति में सक्रीय हैं। वे पहली बार 1971 में राधोगढ़ नगर पालिका के अध्यक्ष चुने गए थे। उसके बाद कांग्रेस ने उन्हें मौका देते हुए 1977 में राधोगढ़ से विधानसभा का टिकिट दिया था और वे पहली बार 1977 में मध्य प्रदेश विधानसभा पहुंचे।

1980 में एक बार फिर राधोगढ़ से विधानसभा चुनाव जीतने के पश्चात दिग्विजय सिंह को अर्जुन सिंह सरकार में राज्य मंत्री बनाया गया और बाद में वे कृषि मंत्री बने। इतना ही नही 1984 और 1992 दिग्विजय सिंह लोकसभा चुनाव जीतकर संसद भी पहुंचे।

अपने राजनैतिक कैरियर के दौरान दिग्विजय सिंह दस वर्षो तक मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री भी रहे हैं। यही कारण है कि मध्य प्रदेश की राजनीति में आज भी उनकी तूती बोलती है और हाईकमान उन्हें चाहकर भी नज़रअंदाज नही कर सकता।

जानकारों की माने तो मध्य प्रदेश की राजनीति में दिग्विजय सिंह अपने ठोस अनुभवो के चलते बीजेपी पर हमेशा भारी रहे हैं। वे बीजेपी की उन कमजोरियों को जानते हैं जहाँ हमला करने से उसकी जड़ें हिल जाएँगी। माना जा रहा है कि नए प्रदेश अध्यक्ष कमलनाथ दिग्विजय सिंह की सलाह लेकर ही आगे बढ़ रहे हैं।

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