साफ़ शब्दों में समझिये, कितना खरा है बजट में इनकम टेक्स पर छूट का एलान

नई दिल्ली। केंद्र की मोदी सरकार द्वारा कल पेश किये गए बजट में आयकर में छूट की सीमा ढाई लाख से बढाकर पांच लाख किये जाने के एलान को मध्यम वर्ग सही से समझ नहीं पा रहा।

सरकार ने जो एलान किया है उसका सीधा मतलब यही है कि अब पांच लाख तक की आय टेक्स फ्री हो जाएगी और अब इतनी आये पर कोई इनकम टेक्स नहीं देना होगा लेकिन सरकार के इस एलान में कई पेंच हैं जिन्हे समझने के लिए आपको पूरी खबर पढ़नी होगी। आपको यह भी समझना होगा कि टेक्स में राहत के लिए इन्कमटेक्स किस तरह केलकुलेट किया जाएगा।

दरअसल, अंतरिम बजट में पांच लाख तक टैक्स वाले इनकम ही टैक्स से छूट दी गई है। टैक्स स्लैब में कोई बदलाव नहीं किया गया है। बजट में मध्‍यवर्ग के लिए स्टैंडर्ड छूट को बढ़ाकर 40 हजार से बढ़ाकर 50 हजार किया गया है।

अंतरिम बजट में आयकर में छूट के एलान की सच्चाई यह है कि अगर आपकी टैक्सेबल इनकम (टैक्स छूट घटाने के बाद) पांच लाख से ज्यादा है तो आपको मौजूदा टैक्स स्लैब के हिसाब से ही टैक्स चुकाना होगा।

87 ए के तहत मिलेगा फायदा:

वित्त मंत्री पीयूष गोयल ने इनकम टैक्स एक्ट के सेक्शन 87 ए के तहत रिबेट का प्रावधान किया है। अभी 2500 रुपये की रिबेट 3.5 लाख रुपये की इनकम से लेकर 5 लाख रुपये की इनकम पर मिलती है। जिसे अब बढ़ाकर 12500 रुपये कर दिया गया है।

ऐसे में अगर सभी तरह की टैक्स बचत करने के बाद इनकम 5 लाख रुपये से ज्यादा हो जाती है तो कोई इनकम टैक्स रिबेट नहीं मिलेगी। पूरे टैक्सबेल इनकम पर पुराने टैक्स स्लैब के अनुसार टैक्स देनदारी बनेगी।

-बचत के बाद टैक्सबेल इनकम 5 लाख रुपये बनती है तो टैक्स देनदारी नहीं

– बचत के अगर टैक्सेबल इनकम 5 लाख रुपये से ज्यादा हो जाती है, तो देनदारी पुराने टैक्स स्लैब के अनुसार तय होगी।

अंतरिम बजट में आयकर में छूट के एलान की सच्चाई यह है कि अगर आपकी टैक्सेबल इनकम (टैक्स छूट घटाने के बाद) पांच लाख से ज्यादा है तो आपको मौजूदा टैक्स स्लैब के हिसाब से ही टैक्स चुकाना होगा।

8 लाख रुपये तक कमाई, 80 सी के तहत 1.5 लाख की बचत, एचआरए 1 लाख रुपये

पुरानी पद्धति – अगर किसी व्यक्ति की सालाना इनकम 8 लाख रुपये हैं, तो ढाई लाख रुपये तक कोई टैक्स नहीं है। ऐसे में 80 सी के तहत निवेश और स्टैंडर्ड डिक्शन और एचआरए के बाद उसकी टैक्सेबल इनकम 2 लाख 60 हजार रुपये बनती है। इस पर पांच फीसदी टैक्स देनदारी होगी। इस स्थिति में 13 हजार रुपये सालाना टैक्स देना होगा।

नई पद्धति – अगर किसी व्यक्ति की सालाना इनकम 8 लाख रुपये हैं और वह 80 सी के तहत निवेश और स्टैंडर्ड डिक्शन और एचआरए का फायदा लेता है, तो उसकी टैक्सेबल इनकम 2.5 लाख रुपये बनेगी। जिस पर 5 फीसदी के आधार पर 12500 रुपये टैक्स देनदारी होगी। जिस पर 12500 रुपये की छूट मिलेगी। ऐसे में उसे कोई टैक्स नहीं देना होगा।

10 लाख रुपये तक कमाई, 80 सी के तहत 1.5 लाख की बचत, एचआरए 1 लाख रुपये

पुरानी पद्धति – अगर किसी व्यक्ति की सालाना इनकम 10 लाख रुपये हैं, तो ढाई लाख रुपये तक कोई टैक्स नहीं है। ऐसे में 80 सी के तहत निवेश, स्टैंडर्ड डिक्शन और एचआरए के बाद उसकी टैक्सेबल इनकम 4 लाख 60 हजार रुपये बनती है। इस पर 5 फीसदी टैक्स देनदारी होगी। इस स्थिति में 23 हजार रुपये सालाना टैक्स देना होगा।

नई पद्धति – अगर किसी व्यक्ति की सालाना इनकम 8 लाख रुपये हैं और वह 80 सी के तहत निवेश और स्टैंडर्ड डिक्शन और एचआरए का फायदा लेता है, तो उसकी टैक्सेबल इनकम 4.5 लाख रुपये बनेगी। जिस पर 5 फीसदी के आधार पर 22500 रुपये टैक्स देनदारी होगी। जिस पर 12500 रुपये की छूट मिलेगी। ऐसे में कुल टैक्स देनदारी 10 हजार रुपये होगी। ऐसे में नए प्रावधान पर 13 हजार रुपये की बचत होगी।

13 लाख रुपये तक कमाई, 80 सी के तहत 1.5 लाख की बचत, एचआरए 1 लाख

पुरानी पद्धति – अगर किसी व्यक्ति की सालाना इनकम 13 लाख रुपये हैं, तो ढाई लाख रुपये तक कोई टैक्स नहीं है। ऐसे में 80 सी के तहत निवेश, स्टैंडर्ड डिक्शन और एचआरए के बाद उसकी टैक्सेबल इनकम 7 लाख 60 हजार रुपये बनती है। इस पर 20 फीसदी टैक्स देनदारी होगी। इस स्थिति में 1.52 लाख रुपये सालाना टैक्स देना होगा।

नई पद्धति – अगर किसी व्यक्ति की सालाना इनकम 13 लाख रुपये हैं और वह 80 सी के तहत निवेश और स्टैंडर्ड डिक्शन और एचआरए का फायदा लेता है, तो उसकी टैक्सेबल इनकम 7.5 लाख रुपये बनेगी। जिस पर 20 फीसदी के आधार पर 1.50 रुपये टैक्स देनदारी होगी। ऐसे में उसको 2 हजार का फायदा होगा।

दो लाख रुपये के होम लोन पर इनकम टैक्स देनदारी

सबसे पहले नए टैक्स स्लैब के हिसाब से पांच लाख रुपये तक की इनकम को टैक्स फ्री कर दिया गया है। इसके अलावा कोई व्यक्ति आयकर अधिनियम की धारा 80 सी के तहत 1.5 लाख रुपये तक फ्री टैक्स का लाभ ले सकता है। यानी उसकी 6.5 लाख रुपये तक की इनकम टैक्स फ्री होगी।

इसी तरह होम लोन पर 2 लाख रुपये तक के ब्याज पर भी टैक्स छूट मिलेगी। ऐसे में 8.5 लाख रुपये तक की इनकम पर टैक्स देनदारी नहीं बनेगी। मेडिकल खर्च पर भी 25 हजार रुपये टैक्स में छूट मिलती है। अगर कोई व्यक्ति 50 हजार रुपये का निवेश एनपीएस के तहत करता है, इसके अलावा 50 हजार स्टैण्डर्ड डिडक्शन का लाभ तो इस तरह वह कुल 9 लाख 75 हजार रुपये तक पर टैक्स देने से बच सकता है।

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