सर्वे में खुलासा: यूपी में भी बना महागठबंधन तो तय हो जाएगी मोदी सरकार की विदाई

नई दिल्ली। 2019 के लोकसभा चुनाव में यदि उत्तर प्रदेश में भी विपक्षी दलों का महागठबंधन बना तो केंद्र से मोदी सरकार की विदाई तय है। एबीपी न्यूज़ और सीवोटर के एक सर्वे में खुलासा हुआ है कि 2019 के चुनाव में भी सत्ता का रास्ता उत्तर प्रदेश से होकर ही जाएगा।

2014 के लोकसभा चुनाव में बीजेपी ने उत्तर प्रदेश की 80 लोकसभा सीटों में से 71 लोकसभा सीटें जीती थीं लेकिन यदि 2019 के लोकसभा चुनाव में सपा बसपा के बीच गठबंधन हुआ तो बीजेपी को महज 28 सीटें ही मिलेंगी। वहीँ यदि उत्तर प्रदेश में सपा बसपा गठबंधन में कांग्रेस भी शामिल हो जाती है तो उत्तर प्रदेश में बीजेपी को और तगड़ा झटका लग सकता है।

सर्वे के मुताबिक यदि उत्तर प्रदेश में महागठबंधन बना तो केंद्र से मोदी सरकार की विदाई तय जायेगी और एनडीए को 534 सदस्यीय लोकसभा में 247 सीटें ही मिलेंगी जो बहुमत से 25 सीटें कम है।

सर्वे में सामने आया है कि महाराष्ट्र और तमिलनाडु में यूपीए अच्छा प्रदर्शन करेगी। वहीँ ओडिशा में बीजेपी का प्रदर्शन बेहतर होने की उम्मीद है और उसे 21 में 15 लोकसभा सीटें मिल सकती हैं।

वहीँ दूसरी तरफ सर्वे रिपोर्ट में कहा गया है कि यदि उत्तर प्रदेश में सपा बसपा गठबंधन नहीं होता है तो एक बार फिर एनडीए की सत्ता में वापसी हो सकती है और वह बहुमत से 19 सीटें अधिक यानी 291 सीटें तक जीत सकता है।

गौरतलब है कि उत्तर प्रदेश में 2014 के लोकसभा चुनाव के बाद हुए उपचुनाव में सपा बसपा और रालोद ने मिलकर चुनाव लड़ा था। यही कारण था कि गोरखपुर, फूलपुर और कैराना लोकसभा सीट के उपचुनाव में बीजेपी को कड़ी शिकस्त का सामना करना पड़ा था।

गठबंधन के प्रयास में जुटी है कांग्रेस:

जहाँ तक कांग्रेस का प्रश्न है तो कांग्रेस कम से कम 7 राज्यो में गठबंधन पार्टनर तय कर चुकी है। कांग्रेस ने 2019 के आम चुनावो के लिए आंध्र प्रदेश में तेलगुदेशम पार्टी, कर्णाटक में जनता दल सेकुलर, बिहार में राष्ट्रीय जनता दल, झारखंड में जेएमएम और राजद, महाराष्ट्र मे एनसीपी, तमिलनाडु में डीएमके और तेलंगाना में टीडीपी और मुस्लिम लीग से गठबंधन किया है।

वहीँ कांग्रेस की तरफ से पश्चिम बंगाल, उत्तर प्रदेश में अभी गठबंधन को लेकर कोशिशें जारी हैं। पंजाब, राजस्थान, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ में कांग्रेस अकेले दम पर चुनाव लड़ने की स्थति में है वहीँ दिल्ली में वह गठबंधन के लिए आम आदमी पार्टी के सम्पर्क में हैं।

गठबंधन को लेकर ये हैं अड़चने:

एनसीपी सुप्रीमो शरद पवार ने अभी हाल ही में कहा था कि क्षेत्रीय दलों द्वारा अधिक सीटों की मांग के चलते गठबंधन में दिक्क्तें पैदा हो रही हैं। इसके बावजूद महाराष्ट्र में कांग्रेस एनसीपी मिलकर चुनाव लड़ेंगे। समझा जाता है कि उत्तर प्रदेश और पश्चिम बंगाल में भी गठबंधन को लेकर यही अड़चने हैं। दोनों राज्यों में स्थानीय पार्टियां अधिक सीटों की मांग कर रही हैं।

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