चुनाव

सर्वेक्षणों और दावों से अलग अब 55 और 70 पर अटका बीजेपी का भाव

सूरत। गुजरात विधानसभा चुनावो को लेकर बीजेपी या न्यूज़ चैनल अपने सर्वेक्षणों में जो भी दावे कर रहे हों लेकिन पिछले दस दिनों में गुजरात के सटोरियों ने बीजेपी के भाव को आसमान से ज़मीन पर पटक दिया है। गुजरात चुनाव के एलान के समय सटोरिये बीजेपी पर बड़ा दांव लगा रहे थे लेकिन जैसे जैसे चुनाव करीब आ रहा है बीजेपी का भाव भी गिर रहा है।

नाम प्रकाशित न करने की शर्त पर एक कारोबारी ने कहा कि आजकल बीजेपी नेता प्रतिदिन सुबह सुबह फोन करके भाव जान रहे हैं। बड़ा कारण प्रतिदिन गिर रहे बाज़ार को लेकर है। कारोबारियों की माने तो पीएम मोदी के सभा करने के बाद भी बीजेपी के भावो का गिरना जारी है।

सूत्रों की माने तो चुनाव का एलान होने के समय सटोरिये बीजेपी को 100 से 120 सीटें तक दे रहे थे। उस समय बीजेपी का भाव 110 और कांग्रेस का 80 रुपये चल रहा था लेकिन कांग्रेस की नवसृजन यात्रा समाप्त होते होते कांग्रेस और बीजेपी के बीच का फासला भी कम होता चला गया।

सूत्रों के अनुसार हार्दिक पटेल द्वारा कांग्रेस के समर्थन के एलान के बाद बीजेपी को बड़ा झटका लगा और चंद दिनों में बीजेपी का भाव मूँह के बल गिर पड़ा है। पिछले सप्ताह तक सटोरिये बीजेपी को 100 सीटों तक दे रहे थे लेकिन एक सप्ताह के अंदर ही भाव पलटा और बाजार में बीजेपी पिछड़ने लगी।

सूत्रों की माने तो अब बीजेपी की 55 से 70 सीटें ऐसी हैं जिन पर भाव अधिक है शेष रही सीटों पर कांग्रेस का भाव बढ़ा है। सूत्रों ने कहा कि राज्य सभा चुनाव के दौरान अहमद पटेल की जीत से सटोरियों को बड़ा नुक्सान हुआ था। इसलिए इस बार सटोरिये किसी तरह का जोखिम नही उठा रहे।

सूत्रों ने कहा कि सटोरिये इस बार एक एक सीट का आंकलन कर रहे हैं। यही कारण है कि भावो में तेजी से उतार चढ़ाव हो रहा है। राज्य में पहले जैसा माहौल नहीं है जब सटोरिये आँख बंद करके बीजेपी पर दांव लगा देते थे। इस बार परिस्थितियां बीजेपी के अनुकूल दिखाई नहीं देतीं।

वहीँ गुजरात चुनाव को लेकर जनता की अपनी अपनी राय है लेकिन सामान्य तौर पर एक राय जो दिख रही है वह राज्य में सत्ता परिवर्तन को लेकर है। पिछले चुनावो में दस में से आठ लोग बीजेपी की सत्ता में वापसी का दावा करते थे लेकिन इस बार हवा बदली सी दिख रही है। दस लोगों में से सात लोग इस बात को स्वीकार कर रहे हैं कि गुजरात में इस बार सत्ता विरोधी लहर है और इस बार इसका बड़ा खामियाजा बीजेपी उठाएगी।

इस बार गुजरात को लेकर लोगों की राय पिछले चुनावो से भिन्न है। वे इस बार चुनाव को पहले की तरह एकतरफा नहीं मानते। यहाँ तक कि कभी बीजेपी का चुनाव लड़ाने वाले लोग भी दबी ज़ुबान में इस बात को स्वीकार कर रहे हैं कि इस बार बीजेपी बेअसर साबित हो रही है।

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