सपा बसपा पर लग रहे मुस्लिम लीडरशिप को किनारे लगाने के आरोप, कांग्रेस ने बनाया ये प्लान

लखनऊ ब्यूरो। उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी – बहुजन समाज पार्टी के बीच हुए गठबंधन के बाद कल उत्तर प्रदेश कांग्रेस के प्रभारी गुलामनबी आज़ाद द्वारा गठबंधन को लेकर दिए बयान के बाद अब कयास लगाए जा रहे हैं कि जिन दलों को सपा बसपा गठबंधन में जगह नहीं मिली उन दलों को कांग्रेस अपने गठबंधन में ला सकती है।

पार्टी सूत्रों की माने तो राज्य में कांग्रेस प्रोग्रेसिव समाजवादी पार्टी(लोहिया), पीस पार्टी, राष्ट्रीय ओलमा काउंसिल, अपना दल(कृष्णा पटेल), बहुजन क्रांति दल जैसे दलों को लेकर एक गठजोड़ बना सकती है। वहीँ यह भी कयास लगाए जा रहे हैं कि सपा-बसपा गठबंधन में सिर्फ तीन सीटें मिलने से असंतुष्ट नज़र आ रहे अजीत सिंह के राष्ट्रीय लोकदल को पश्चिमी उत्तर प्रदेश में ज़्यादा सीटें देकर कांग्रेस रालोद को सपा बसपा गठबंधन से बाहर खींच सकती है।

चूँकि प्रोग्रेसिव समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष शिवपाल यादव स्वयं कांग्रेस से गठबंधन के इरादे ज़ाहिर कर चुके हैं,इसलिए माना जा रहा है कि शिवपाल और कांग्रेस के बीच गठबंधन में कोई अड़चन नहीं है। जानकारों की माने तो शिवपाल सिंह यादव का इटावा, मैनपुरी, औरैया जैसी यादव बाहुल्य सीटों के अलावा फ़िरोज़ाबाद, शिकोहाबाद में संगठन काफी मजबूत है और उनकी पार्टी कम से कम दस लोकसभा सीटों पर समाजवादी पार्टी के लिए कड़ी चुनौती पेश कर सकती है।

वहीँ आज़मगढ़ और उसके आसपास के इलाको में ओलमा काउंसिल को पीस पार्टी को गोरखपुर और उसके आसपास की कुछ सीटें, तथा अपना दल (कृष्णापटेल) को मिर्ज़ापुर और भदोई के आसपास के इलाको की लोकसभा सीटें दी जा सकती हैं।

राष्ट्रीय ओलमा काउंसिल और पीस पार्टी को गठबंधन में जगह देकर कांग्रेस मुस्लिमो की उस आवाज़ को ताकत दे सकती है जिसमे सपा बसपा पर मुसलिम दलों के अनदेखी के आरोप लग रहे हैं। बता दें कि सपा बसपा गठबंधन के बाद सोशल मीडिया पर इस तरह के पोस्टो की अचानक बाढ़ आ गयी जिसमे मुसलमानो ने सपा बसपा पर मुस्लिम लीडरशिप को खत्म करने के आरोप लगाए थे।

वहीँ सूत्रों की माने तो जनवरी के अंत तक कांग्रेस इस गठबंधन को अंजाम तक पहुंचा सकती है। यदि इस तरह का गठबंधन सम्भव होता है तो निश्चित तौर पर कांग्रेस को उम्मीद से अधिक सफलता मिल सकती है।

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