सपा, बसपा के भरोसे नहीं बैठी कांग्रेस, 2019 के लिए चल रहीं बड़ी तैयारियां

नई दिल्ली (राजाज़ैद)। अभी हाल ही में हुए पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव में अच्छा प्रदर्शन करने के बाद अब कांग्रेस की नज़र आगामी लोकसभा चुनाव पर लगीं हैं।

2019 के चुनाव से पहले विपक्ष एकजुट हो पायेगा अथवा नहीं इसे लेकर कांग्रेस पूरी तरह आश्वस्त नहीं है लेकिन विपक्ष के कुछ नेता अभी भी इस कोशिश में लगे हैं कि किसी भी तरह 2019 के चुनाव के एलान से पहले विपक्षी दल एक मंच पर आ जाएँ और विपक्ष का महागठबंधन बन जाए।

चुनावी जानकारों की माने तो यदि विपक्ष एकजुट नहीं हुआ तो 2014 के आम चुनाव की तरह ही बीजेपी को एकबार फिर सेकुलर मतों के बंटवारे का फायदा मिलेगा। इस समय विपक्षी एकता की जो तस्वीर दिखाई दे रही है उसमे समाजवादी पार्टी और बहुजन समाज पार्टी नज़र नहीं आ रहे हैं। शायद कांग्रेस यह मानकर चल रही है कि कहीं न कहीं अंतिम समय पर बसपा और सपा अलग रास्ते पर जा सकते हैं।

मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और राजस्थान में हाल ही में हुए विधानसभा चुनावो में भी कांग्रेस का बसपा और सपा से गठबंधन नहीं हो सका था। हालाँकि इस सबके बावजूद कांग्रेस अपनी नैया पार लगाने में कामयाब रही है। लेकिन विधानसभा और लोकसभा चुनावो में बड़ा फर्क है। यदि लोकसभा चुनावो में विपक्ष एकजुट नहीं हुआ तो बीजेपी को लाभ मिलने से इंकार नहीं किया जा सकता।

उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी और बहुजन समाज पार्टी के तेवरों को देखकर लगता है कि भले ही बाकी विपक्ष एकजुट हो जाए लेकिन ये दो पार्टियां अपनी महत्वाकांक्षा के चलते गठबंधन का हिस्सा नहीं बनेगी। अहम वजह है कि दोनों ही पार्टियां गठबंधन में देश के हर राज्य में सीटें मिलने की उम्मीद लगाए बैठी हैं जो सम्भव नहीं है।

वहीँ कांग्रेस सूत्रों की माने तो पार्टी ने सपा बसपा के रुख को भांपते हुए उत्तर प्रदेश में अपने अन्य विकल्पों पर काम करना शुरू कर दिया है। इसके अलावा यदि महागठबंधन नहीं बना तो उस स्थति में कांग्रेस राज्य स्तर पर क्षेत्रीय पार्टियों के साथ मिलकर चुनाव लड़ेगी।

हाल ही में तेलंगाना में हुए विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने टीडीपी, कम्युनिस्ट और मुस्लिम लीग सहित पांच दलों के साथ गठबंधन कर चुनाव लड़ा था। इससे यह बात साफ़ हो गयी कि क्षेत्रीय पार्टियों के साथ मिलकर चुनाव लड़ने की रणनीति पर कांग्रेस ने काम करना शुरू कर दिया है।

जहाँ तक उत्तर प्रदेश का प्रश्न है तो राज्य में सपा, बसपा प्रमुख विपक्षी दल हैं और कांग्रेस की पहली प्राथमिकता दोनों दलों के साथ गठबंधन कर चुनाव लड़ना होगी लेकिन यदि सपा बसपा से गठबंधन नहीं हुआ तो ऐसी स्थति में कांग्रेस ने अजीत सिंह के राष्ट्रीय लोकदल, शिवपाल सिंह यादव के प्रोग्रेसिव समाजवादी पार्टी और शरद यादव की लोकतान्त्रिक जनता दल के साथ मिलकर लोकसभा चुनाव लड़ने का विकल्प खुला रखा है।

पार्टी सूत्रों की माने तो उत्तर प्रदेश की 80 लोकसभा सीटों को छोड़ भी दिया जाए तब भी 320 सीटें ऐसी हैं जहाँ या तो कांग्रेस क्षेत्रीय दलों के साथ अपना गठबंधन तय कर चुकी है या अकेले लड़ेगी। सूत्रों के मुताबिक देश के 8 राज्यों में कांग्रेस अपना गठबंधन पाटर्नर तय कर चुकी है।

इनमे आंध्र प्रदेश में टीडीपी, तमिलनाडु में डीएमके, महाराष्ट्र में एनसीपी, पश्चिम बंगाल में वामपंथी या तृणमूल कांग्रेस, कर्णाटक में जेडीएस,झारखंड में राजद और जेएमएम,जम्मूकश्मीर में नेशनल कॉन्फ्रेंस और बिहार में राष्ट्रीय जनता दल शामिल हैं।

जिन 7 राज्यों में कांग्रेस गठबंधन तय कर चुकी हैं उनमे लोकसभा की कुल 242 सीटें हैं। इनमे आंध्रप्रदेश में 25, कर्नाटक में 28, महाराष्ट्र में 48, पश्चिम बंगाल में 42, तमिलनाडु में 39, जम्मू कश्मीर में 06, झारखंड में 14 और बिहार में 40 लोकसभा सीटें हैं।

वहीँ जिन चार राज्यों में कांग्रेस की सरकारें हैं उनमे लोकसभा की कुल 78 सीटें हैं जिनमे छत्तीसगढ़ में 11, मध्य प्रदेश में 29, पंजाब में 13 और राजस्थान में लोकसभा की 25 सीटें हैं।

ऐसे में कांग्रेस यह मानकर चल रही है कि जिन चार राज्यों में उसकी सरकार हैं वहां की 78 सीटों पर वह बिना किसी से गठबंधन किये अच्छा परफॉर्म कर सकती है। वहीँ जिन 8 राज्यों में वह गठबंधन तय मानकर चल रही हैं उन 8 राज्यों की कुल 242 सीटों पर  क्षेत्रीय दलों के साथ गठबंधन कर बीजेपी की स्पीड पर ब्रेक लगाया जा सकता है।

ऐसे में लोकसभा की 543 सीटों में से यदि 306 सीटों पर यदि पार्टी अच्छा परफॉर्म करती है तो बीजेपी की विदाई तय है। सूत्रों ने कहा कि पार्टी नेताओं का मानना है कि उत्तर प्रदेश की 80 लोकसभा सीटों में से कम से कम 40 सीटों पर भी पार्टी अच्छा परफॉर्म कर सकती है।

सूत्रों ने कहा कि पार्टी नेता मानकर चल रहे हैं कि 2019 का चुनाव 2014 से बिलकुल अलग होगा। इस बार सभी राज्यों में मोदी सरकार के खिलाफ माहौल बनना अभी से शुरू हो गया है। सूत्रों ने कहा कि जैसे जैसे चुनाव का समय करीब आएगा वैसे वैसे कांग्रेस के लिए माहौल और बेहतर बनेगा।

सूत्रों ने कहा कि उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी और बसपा के साथ गठबंधन हो या न हो, पार्टी दोनों विकल्पों को लेकर आएगी बढ़ रही है और जल्द ही उत्तर प्रदेश में नेतृत्व परिवर्तन कर चुनावी कामकाज शुरू कर दिया जाएगा।

जब सूत्रों से पूछा गया कि उत्तर प्रदेश में राज बब्बर के स्थान पर नया अध्यक्ष कौन हो सकता है ? इस पर सूत्रों ने कहा कि जनवरी का महीना देश की राजनीति का रुख बदल सकता है। संभावना जताई जा रही है कि अगले महीने देश की राजनीति में बड़ी उथलपुथल हो सकती है। बीजेपी के कई नेता इधर से उधर पार्टी बदलते नज़र आ सकते हैं।

जनवरी के अंत तक देश में नई राजनैतिक तस्वीर बन सकती है। जिसके बाद कई चीज़ें जो आज धुंधली दिखाई दे रही हैं, वे चीज़ें साफ़ दिखने लगेंगी और फिर कयासों और अटकलें लगाने की आवश्यकता नही पड़ेगी।

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