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संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में स्थायी सीट हासिल करने के भारत की कोशिश को झटका

संयुक्त राष्ट्र । संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में इस साल तत्काल सुधार कराने और इसमें स्थायी सीट हासिल करने के भारत के प्रयास को उस वक्त झटका लगा जब महासभा ने वैश्विक निकाय की इस महत्वपूर्ण इकाई में सुधार पर चर्चा को अगले सत्र के लिए स्थगित करने का फैसला किया।

भारत ने जी4 देशों के साथ आवाज बुलंद करते हुए कहा कि यह ‘दुर्भाग्यपूर्ण’ है कि मौजूदा सत्र में इस मुद्दे को लेकर माहौल नहीं बनाया जा सका। संयुक्त राष्ट्र में ब्राजील के राजदूत एंटोनियो डी एग्वेर पैट्रिओटा ने जी-4 देशों की ओर से पक्ष रखते हुए कहा कि संयुक्त राष्ट्र 15 सदस्यीय सुरक्षा परिषद में बहुत समय से लंबित सुधारों को क्रियान्वित कराने में सफलता हासिल करने और दस दिशा में आगे बढ़ने में नाकाम रहा। जी4 में भारत, ब्राजील, जर्मनी और जापान शामिल हैं। ये चारों देशों सुरक्षा परिषद की स्थायी सदस्यता के दावेदार हैं।

पैट्रिओटा ने बुधवार, 27 जुलाई को महासभा में कहा, ‘इसकी पूरी उम्मीद थी कि ठोस बातचीत की दिशा में बढ़ने का समय आ गया है। यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि संयुक्त राष्ट्र की 70वीं वर्षगांठ इस महत्वपूर्ण विषय पर समझौते पर पहुंचने की बात ध्यान में रखते हुए महौल नहीं बना सकी।’ भारत महासभा के 70वें सत्र में सुरक्षा परिषद में सुधारों को पूरा करने के लिए जोर दे रहा था। यह सत्र इसी साल सितंबर में पूरा हो जाएगा।

आम सहमति से कदम उठाते हुए महासभा ने यह फैसला किया कि सदस्य देश सुरक्षा में सुधार पर चर्चा 71वें सत्र में जारी रखेंगे जो सितम्बर में शुरू होगा। जी-4 के पक्ष की जोरदार पैरवी करते हुए पैट्रिओटा ने कहा कि सुरक्षा परिषद में सुधार महासभा के एजेंडे में लंबित एक बहुत ही महत्वपूर्ण मुद्दा है। उन्होंने कहा कि यह महत्वपूर्ण है कि अगर इस प्रक्रिया का कोई मतलब है तो सदस्य देश विषय आधारित, और वास्तविक बातचीत करें।

ब्राजील के राजदूत ने कहा कि यह सच्चाई है कि सुरक्षा परिषद की दोनों श्रेणियों (स्थायी और अस्थायी) में सदस्यता के विस्तार का समर्थन करने वाले सदस्य देशों की संख्या बढ़ रही है, लेकिन लिखित में इसे दर्ज नहीं किया गया है। उन्होंने कहा, ‘हम जितने लंबे समय के लिए सुरक्षा परिषद में सुधार पर फैसले को टालेंगे, संयुक्त राष्ट्र को शांति एवं सुरक्षा को बढ़ावा देने के उसके मुख्य कामकाज के संदर्भ में इतना ही अधिक अपयश मिलेगा। हम संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में सुधार को लेकर अब टालमटोल नहीं कर सकते।’

पैट्रिओटा ने इस बात पर जोर दिया कि दुनिया भर में अप्रत्याशित संकटों और सुरक्षा के लिए पैदा हुए खतरों को देखते हुए लोगों को संयुक्त राष्ट्र से ‘साहसिक नेतृत्व’ और ‘बदलाव की प्रतिबद्धता’ की उम्मीद की थी। उन्होंने कहा, ‘ज्यादातर लोग समझ चुके हैं कि यथास्थिति बरकरार रखना कोई विकल्प नहीं हो सकता।’ पिछले साल संयुक्त राष्ट्र में भारत के राजदूत अशोक मुखर्जी ने कहा था कि भारत संयुक्त राष्ट्र की 70वीं वर्षगांठ के दौरान सुरक्षा परिषद में सुधार को पूरा होते देखना चाहता है।

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