संघ का बीजेपी को अल्टीमेटम, 2019 में इन मुद्दों पर हो सकती है पार्टी की हार

नई दिल्ली। 2019 के लोकसभा चुनाव से पहले राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने भाजपा के सामने खतरे की घंटी बजा दी है। संघ ने दो मुद्दों का हवाला देकर भय जताया है कि अगले आम चुनाव में पार्टी के लिए भारी पड़ सकती हैं। ये दो मुद्दे हैं बेरोजगारी और किसानों की समस्याएं।

सूत्रों के मुताबिक संघ के अल्टीमेटम के बाद पार्टी अध्यक्ष अमित शाह उज्जैन में संघ प्रमुख मोहन भागवत से मुलाकात करेंगे। मोहन भागवत 30 दिसंबर से उज्जैन में डेरा जमाये बैठे हैं।

सूत्रों के मुताबिक संघ ने गुजरात चुनाव परिणामो के बाद ही अपनी समीक्षा रिपोर्ट में पार्टी के तौर तरीको पर सवाल उठाये थे। सूत्रों की माने तो पार्टी अध्यक्ष अमितशाह को भेजी गयी रिपोर्ट में संघ ने गुजरात चुनाव में पार्टी की रणनीति से असहमति ज़ाहिर की है। इतना ही नहीं संघ ने दो टूंक शब्दों में लिखा है कि आरएसएस हर बार बीजेपी को नहीं जिता सकता।

संघ ने अपनी समीक्षा रिपोर्ट में दलितों और आदिवासियों के बीजेपी से दूरी बनाने पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए भविष्य में बड़े नुकसान सामने आने की सम्भावना जताई है।

मंगलवार को उज्जैन में संघ प्रमुख मोहन भागवत ने दलितों और आदिवासियों के बीच खास तौर पर पैठ बनाने पर जोर दिया। इसकी वजह गुजरात नतीजों को माना जा रहा है।

संघ के सूत्रों का कहना है कि संघ प्रमुख भागवत बुधवार को भी कुछ विशिष्टजनों से चर्चा करेंगे। इस चर्चा का विषय मध्य प्रदेश सहित अन्य राज्यों में इस वर्ष होने वाले विधानसभा चुनाव और 2019 में लोकसभा चुनाव हो सकते हैं।

वहीँ टेलीग्राफ की एक रिपोर्ट के मुताबिक भारतीय मंजदूर संघ से जुड़े आरएसएस के एक नेता ने कहा कि वे लोग किसानों द्वारा सामना की जाने वाली समस्याएं और नौकरी के मौकों की कमी को लेकर भाजपा को बार-बार चेतावनी दे रहे थे। संघ नेता ने कहा, ‘अगर सरकार हमारी बात पर ध्यान देती तो भाजपा का गुजरात में इस तरह का प्रदर्शन नहीं होता।’

उन्होंने कहा कि अगर भाजपा इन दो मुद्दों पर काम नहीं करती है तो 2019 के लोकसभा चुनाव और 2018 के विधानसभा चुनावों में पार्टी की राह मुश्किल हो सकती है।

आरएसएस की आर्थिक शाखा स्वदेशी जागरण मंच के एक नेता ने कहा कि गलत आर्थिक नीतियां किसानों और युवाओं की मुश्किलों का सबब बनती जा रही है। स्वदेशी जागरण मंच ने इस बावत सरकार को कुछ सुझाव दिये हैं। उन्होंने कहा कि अगर वक्त पर कदम नहीं उठाये गये तो हालात नियंत्रण से बाहर जा सकते हैं।

बता दें कि गुजरात चुनाव में भाजपा ने भले ही सरकार बना ली है लेकिन पिछले लोकसभा चुनाव की तुलना में इस चुनाव में भाजपा के सीटों में कमी आई है। इस चुनाव में भाजपा को 100 सीटें भी हासिल नहीं हो सकी हैं जबकि बीते चुनाव में पार्टी के खाते में 115 सीटें गई थी।

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