शीतकालीन सत्र से पहले एनडीए को लग सकता है एक और झटका

नई दिल्ली। संसद के शीतकालीन सत्र से पहले एनडीए को एक और झटका लग सकता है। एनडीए में सहयोगी पार्टी राष्ट्रीय लोकसमता पार्टी एनडीए से अलग हो सकती है।

बिहार में लोकसभा सीटों के बंटवारे को लेकर बीजेपी, जेडीयू और लोकसमता पार्टी के बीच फंसा पेंच नहीं निकल सका है। इसे सुलझाने की अंतिम कोशिशें उस समय व्यर्थ साबित हुईं जब लोकसमता पार्टी के अध्यक्ष अमित शाह के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से भी मिलने में नाकामयाब हुए।

लोकसमता पार्टी के अध्यक्ष उपेंद्र कुशवाहा की प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मिलने की अवधि शुक्रवार को समाप्त हो गयी। भाजपा अध्यक्ष अमित शाह द्वारा उनको समय नहीं दिये जाने के बाद उन्होंने ट्वीट कर प्रधानमंत्री से 27-30 नवंबर के बीच मिलने का समय मांगा था।

इस समय प्रधानमंत्री विदेश में हैं। ऐसे में उनके मिलने की उम्मीदें समाप्त हो गयी हैं। माना जा रहा है कि बीजेपी और लोकसमता पार्टी के बीच किसी तरह की सहमति बनने की उम्मीदें अब समाप्त हो चुकी हैं और अब उपेंद्र कुशवाहा के अगले कदम से ही तस्वीर साफ़ हो पाएगी।

इससे पहले लोकसमता पार्टी के अध्यक्ष राजद नेता तेजस्वी यादव और लोकजनशक्ति पार्टी के नेता रामविलास पासवान से अलग अलग मुलाकात कर चुके हैं। जानकारों की माने तो अब उपेंद्र कुशवाहा के पास सिर्फ दो ही रास्ते हैं , पहला यह कि वे एनडीए गठबंधन में जितनी सीटें मिलीं हैं उन्ही पर सतोष करके बैठ जाएँ या एनडीए छोड़कर कांग्रेस और राष्ट्रीय जनता दल के महागठबंधन में शामिल हो जाएँ।

फ़िलहाल देखना है कि लोकसमता पार्टी के अध्यक्ष उपेंद्र कुशवाहा क्या फैसला लेते हैं। जहाँ तक बीजेपी का प्रश्न है तो वह अब उपेंद्र कुशवाहा को भाव नहीं दे रही।

जिस तरह सीटों के बंटवारे को लेकर बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह ने पटना पहुंचकर जेडीयू नेता और बिहार के सीएम नीतीश कुमार से मुलाक़ात की और एनडीए की सहयोगी पार्टी होने के बावजूद लोकसमता पार्टी के अध्यक्ष उपेंद्र कुशवाहा के दिल्ली पहुँचने पर भी उन्हें मुलाकात का समय नहीं दिया गया। उससे साफ़ है कि बीजेपी को अब बिहार में लोकसमता पार्टी की आवश्यकता नहीं रही।

ताज़ा हिंदी समाचार और उनसे जुड़े अपडेट हासिल करने के लिए फ्री मोबाइल एप डाउनलोड करें अथवा हमें फेसबुक, ट्विटर या गूगल पर फॉलो करें