शराबबंदी पर नीतीश की दो टूक ‘पीने का शौक रखने वाले न आएं बिहार’

बिहार में पूर्ण शराब बंदी पर मुख्यमंत्री नितीश कुमार ने साफ़ साफ़ कहा कि शराब पीने का शौक रखने वाले बिहार न आएं । उन्होंने शराब बंदी से बिहार में पर्यटन उद्योग पर बुरा असर पड़ने की आशंका जताने वालो से पूछा कि क्या बिहार में लोग पीने की उम्मीद लेकर आते हैं ?

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पटना । मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने पीने का शौक रखने वालों को बिहार में कदम नहीं रखने की हिदायत दे दी है। सोमवार को जनता दरबार के बाद मुख्यमंत्री ने पत्रकारों से कहा कि जो लोग पीने का इच्छा रखते हैं वे बिहार में न आएं।

सीएम ने कहा कि बिहार में पर्यटन उद्योग पर बुरा असर पड़ने की आशंका जताने वाले अब बताएं कि क्या बिहार में लोग पीने की उम्मीद लेकर आते हैं। बिहार में सबसे अधिक धार्मिक पर्यटक आते हैं। इतिहास-संस्कृति में दिलचस्पी लेने वाले लोग आते हैं। ऐसे पर्यटक तो आते ही रहेंगे। शराबबंदी से बिहार के पर्यटन को कोई नुकसान नहीं होने वाला।

मुख्यमंत्री ने कहा कि जो लोग होटलों को शराबबंदी से बाहर रखने की मांग कर रहे हैं वे तो असल में अपने होटल को ही बदनाम कर रहे हैं। लोग तो यहीं सोचेंगे कि फलां होटल में सिर्फ शराब पीने के लिए ही लोग जाते हैं। हम होटल में शराब परोसने की इजाजत दे दें तो शाम होते ही वहां पर ट्रैफिक जाम लग जाएगा। फिर तो शराबबंदी का मकसद पूरा नहीं होगा।

सीएम ने कहा कि शराबबंदी लागू करते समय हमने सरकारी खजाने में सालाना 5000 करोड़ रुपये के नुकसान की परवाह नहीं की तो होटल वाले दो-चार करोड़ के कारोबार की चिंता क्यों कर रहे हैं? शराब पीने की बजाए लोग खाने भी तो होटल में जाते हैं। उससे भी लोगों की आमदनी बढ़ती है।

सीएम ने कहा शरद यादव के इंकार करने के बाद ही राष्ट्रीय कार्यकारिणी में मुझे अध्यक्ष बनाने का निर्णय लिया गया है। इससे पहले भी कई जिम्मेवारी निभाई है। मेरे अध्यक्ष बनने से बिहार के विकास पर कोई असर नहीं होगा। बिहार की जनता के लिए काम करते रहेंगे। बिहार के लोगों ने जो जिम्मेवारी दी है वह पहली प्राथमिकता है।

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