शपथग्रहण में माया और ममता के शामिल न होने की कमलनाथ ने बताई ये वजह

नई दिल्ली। मध्य प्रदेश में आज राज्य के 18 वे मुख्यमंत्री के तौर पर कमलनाथ द्वारा मुख्यमंत्री पद की शपथ ग्रहण की गयी। शपथ ग्रहण समारोह में कांग्रेस नेताओं के अलावा कई विपक्षी दलों के नेताओं ने भी भाग लिया।

माना जा रहा था कि कमलनाथ के शपथ ग्रहण कार्यक्रम के माध्यम से कांग्रेस विपक्ष की एकजुटता का सन्देश देगी। हालाँकि इस कार्यक्रम में आंध्रप्रदेश के मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू, डीएमके प्रमुख स्टालिन, एनसीपी सुप्रीमो शरद पवार, लोकतान्त्रिक जनता दल नेता शरद यादव, नेशनल कॉन्फ्रेंस नेता फारूक अब्दुल्ला, कर्नाटक के मुख्यमंत्री कुमार स्वामी मौजूद थे।

इन सब के बावजूद बसपा सुप्रीमो मायावती, पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और सपा सुप्रीमो अखिलेश यादव कार्यक्रम से नदारद रहे। विपक्ष से जुड़े इन तीन कद्दावर नेताओं की गैर मौजूदगी पर सवाल उठने लाजमी थे। जबकि बसपा और सपा राज्य में कांग्रेस को समर्थन दे रहे हैं इसके बावजूद मायावती और अखिलेश का कार्यक्रम में शामिल न होना विपक्षी एकता के लिए बड़े झटके के तौर पर देखा जा रहा था।

मध्य प्रदेश में नए मुख्यमंत्री कमलनाथ ने एक न्यूज़ चैनल से बातचीत में तमाम अफवाहों को विराम देते हुए बताया कि उनकी बसपा सुप्रीमो मायावती और पश्चिम बंगाल की सीएम ममता बनर्जी से फोन पर बात हुई थी।

कमलनाथ ने कहा कि इन नेताओं की गैरमौजूदगी को किसी और नज़र से न देखा जाए बल्कि कार्यक्रम में शामिल न होने पाने के पीछे उनकी निजी वजह हैं। उन्होंने कहा कि बसपा सुप्रीमो मायवती की किसी नस में खिचाव आया है। उन्होंने कहा था कि वे डॉक्टर की सलाह के बाद ही आने के बारे में कोई फैसला कर पाएंगी।

वहीँ ममता बनर्जी की अनुपस्थति को लेकर कमलनाथ ने कहा कि उन्होंने फोन पर बताया था कि उनकी मां की पुण्यतिथि के चलते आयोजित पूजा कार्यक्रम में व्यस्त रहेंगी इसलिए वे शपथ ग्रहण कार्यक्रम में शामिल नहीं हो सकेंगी। कमलनाथ ने कहा कि विपक्ष पूरी तरह एकजुट है और इसमें कहीं भी कोई शंका के लिए जगह नहीं बचती।

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