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व्यापम घोटाले में सीएम शिवराज को सीबीआई की क्लीनचिट

नई दिल्ली। व्यापम घोटाले में सीबीआई ने चार्जशीट दाखिल कर दी है। इसमें मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान को क्लीन चिट दे दी गयी है साथ ही सीबीआई ने उन आरोपों को खारिज कर दिया जिसमें कहा जा रहा था कि एक आरोपी के पास के जब्त हार्ड डिस्क में छेड़छाड़ की गई है।

विशेष सीबीआई अदालत के समक्ष दाखिल अपने आरोपपत्र में सीबीआई ने कहा कि मध्य प्रदेश व्यवसायिक परीक्षा मंडल के एक अधिकारी नितिन महिंद्रा से बरामद हार्ड डिस्क ड्राइव के मध्य प्रदेश पुलिस द्वारा कराए गए फॉरेंसिक विश्लेषण से स्पष्ट हुआ है कि उनमें कोई ऐसी फाइल स्टोर नहीं थी जिसमें ‘सीएम’ अक्षर थे।

गौरतलब है कि हार्ड डिस्क को करोड़ों रुपये के भर्ती घोटाले में अहम सबूत माना जा रहा था। इसमें कहा गया है कि पांडेय ने अपने दावे के सर्मथन में दिल्ली हाईकोर्ट और सीबीआई को दो पेन ड्राइव सौंपे थे।

सीबीआई ने कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह और इस मामले में व्हिसलब्लोअर प्रशांत पांडेय के उन आरोपों को भी ख़ारिज कर जिसमे हार्ड डिस्क से छेड़छाड़ होने की बात कही गयी थी। पांडे ने दावा किया था कि इंदौर पुलिस ने 2013 में बरामद हार्ड डिस्क में छेड़छाड़ की थी ताकि रिकार्ड से ‘सीएम’ शब्द हटाए जा सकें।

क्या है व्यापमं घोटाला:

व्यापमं भर्ती घोटाला मध्यप्रदेश का सबसे बड़ा भर्ती घोटाला माना जाता है, इस घोटाले कई बड़े नाम सामने आए जिनमें कुछ लोग तो सलाखों के पीछे पहुंच चुके हैं। खुद हाईकोर्ट इस मामले की जांच पुलिस की स्पेशल इनवेस्टीगेशन टीम से करवा रही है।

आरोप है कि साठगांठ कर मेडिकल और इंजीनियरिंग कॉलेजों में दाखिले में फर्जीवाड़ा कर भर्तियां की गईं। इस घोटाले के अंतर्गत सरकारी नौकरियों में भ्रष्टाचार कर रेवड़ियों की तरह नौकरियां बांटी गईं।

दरअसल मध्य प्रदेश व्यावसायिक परीक्षा मंडल का काम मेडिकल टेस्ट जैसे पीएमटी प्रवेश परीक्षा, इंजीनियरिंग प्रवेश परीक्षा व शैक्षिक स्तर पर बेरोजगार युवकों के लिए भर्ती के लिए प्रतियोगी परीक्षाओं का आयोजन कराना है।

व्यापमं घोटा ला प्रकाश में आने के बाद कई आरोपियों की संदिग्ध रूप से मौत हो गयी। वहीँ अन्य आरोपी मध्य प्रदेश के राज्यपाल रामनरेश यादव के बेटे शैलेश यादव अपने घर में संदिग्ध अवस्था में मृत पाए गए थे।

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