वे ख़बरें, जो मीडिया खुद बनाता है

नई दिल्ली। कई बार देखने में आया है कि समाचार पत्रों में कुछ ऐसे भ्रामक शीर्षकों के साथ ख़बरें प्रकाशित की जाती हैं जिनका कोई सिर पैर नहीं होता। इन खबरों की पड़ताल की जाये तो हकीकत में ऐसा कुछ नहीं होता जैसा कि समाचार पत्रों और न्यूज़ चैनलों पर दावा किया जाता है।

पड़ताल से पता चलता है कि इस तरह की फ़र्ज़ी ख़बरें या तो उन लोगों के बारे में बनाई जाती हैं जो जेल में बंद हैं अपनी सफाई मीडिया में आकर नहीं दे सकते या दूसरे देशो में बैठे हैं। झूठी खबरों का ये सिलसिला कई बार सरकार की चापलूसी का हिस्सा भी होता है।

आज खबर छपी “डरा पाकिस्तान” और शाम को ही पाकिस्तान की तरफ से बॉर्डर पर फायरिंग में हमारे कुछ सैनिक शहीद हो जाते हैं। ऐसी खबरों का पोस्टमार्टम करने से पता चलता है कि वह खबर सिरे से ही गलत थी। न पाकिस्तान डरा था और न ही आधिकारिक तौर पर कोई ऐसी खबर आयी थी जिससे यह सिद्ध होता हो कि पड़ौसी मुल्क डरा बैठा है।

कुछ ऐसी ही भ्रामक खबरें उन लोगों को लेकर चलाई जाती हैं जो किसी कारणवश जेल में बंद हैं और जो अपनी सफाई पेश नहीं कर सकते। ताजा उदाहरण दें तो ऐसी खबरें चलाने के लिए बाबा राम रहीम, हनीप्रीत, नीरव मोदी, विजय माल्या से लेकर दाऊद इब्राहिम या अन्य किसी शख्स के नाम का सहारा लिया जाता है।

फ़र्ज़ी खबरों की माने तो दाऊद इब्राहिम तो न जाने कितनी बार पुलिस की पकड़ से कुछ इंच दूर होकर निकलते रहे हैं। राम रहीम अपनी बेटी से अय्याशी करता था और नीरव मोदी डर से कांप रहा है, ये सब फ़र्ज़ी खबरों का हिस्सा है। मीडिया आजतक इस बात के सबूत नहीं दे सका।

जेल में बंद बाबा राम रहीम या उसकी बेटी ने कभी इस बात को नहीं स्वीकारा कि उनके अवैध संबंध थे। फिर मीडिया और पुलिस की मिलीभगत से ऐसी कहानी बनी और कई दिनों तक टीवी पर चलती रही।

फ़र्ज़ी खबरों का सिलसिला तीन तलाक को लेकर भी जारी रहा था। तीन तलाक पर सरकार के प्रस्तावित बिल को लेकर मीडिया में आई तलाक की कई ख़बरें फर्जी साबित हुईं। उत्तर प्रदेश के सम्भल, मेरठ, चांदपुर और मुरादाबाद, रामपुर की महिलाओं के तलाक को लेकर मीडिया ने दावा किया कि उक्त महिलाएं तीन तलाक देकर उनके पतियों द्वारा छोड़ दी गयी हैं, लेकिन खबर आने के 24 घंटे के अंदर ही उक्त खबर को चलाने वाला मीडिया झूठा साबित हुआ।

कई ऐसे मामले भी प्रकाश में आये जब बड़े मीडिया के साथ छुटभैये मीडिया ने भी फर्जी ख़बरें छापने में सारे रिकॉर्ड तोड़ दिए। 2014 के लोकसभा चुनावो के प्रचार के दौरान एक समाचार पत्र ने एक खबर में दावा किया था कि यदि नरेन्द्र मोदी प्रधानमंत्री बन जायेंगे तो लोगों को आयकर नही देना होगा।

फर्जी ख़बरें छापने का सिलसिला सिर्फ कुछ चुनिन्दा मुद्दों तक ही सीमित नही रहा है बल्कि सरकारी योजनाओं और कार्यक्रमों को लेकर भी बदस्तूर जारी है। काशी को क्यूटो बनाने, स्मार्ट सिटी, बेरोज़गारी दूर करने के सरकार के दावे में कितनी प्रगति हुई, इस पर सरकार के मंत्रियों बयान नही आ रहे बल्कि कुछ मीडिया ही कार्य में प्रगति के दावे कर रहा है।

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