बड़ी खबर बिहार-झारखंड राज्य लाइफ स्टाइल सेहत

विश्व माहवारी स्वच्छता दिवस: चुप्पी तोड़ें, स्वच्छता है सभी का समान अधिकार

मुजफ्फरपुर(सुमन मिश्रा): देश निरंतर विकास के पथ पर अग्रसर है एवं स्वास्थ्य के क्षेत्र में नित्य नए प्रयोगों के माध्यम से लोगों को स्वस्थ रखने की कोशिश की जा रही है. लेकिन इन सब बातो के बीच समुदायों में अभी भी माहवारी स्वच्छता पर चुप्पी कायम है.

इस दिशा में माहवारी स्वच्छता पर खुल कर बात करने एवं लोगों को इसके बारे में जागरूक करने के लिए प्रत्येक वर्ष 28 मई को विश्व माहवारी स्वच्छता दिवस मनाया जाता है. साथ ही माहवारी स्वच्छता सुनिश्चित करने के लिए किशोरियों एवं महिलाओं को सेनेटरी पैड इस्तेमाल करने की जागरूकता पर बल दिया जाता है.

प्रजनन एवं यौन संक्रमण से बचाव जरुरी:

सदर अस्पताल से सिविल सर्जन डॉ शैलेश प्रसाद सिंह ने बताया कि विश्व मासिक धर्म स्वच्छता दिवस का मकसद समाज को एक स्वास्थ्य संदेश देना है कि हमारी मां, बहनें व बेटियां कैसे स्वच्छ और स्वस्थ रहें. मासिक धर्म के दौरान स्वच्छता बहुत जरुरी होता है. इससे प्रजनन एवं यौन संक्रमण की रोकथाम में मदद मिलती है. माहवारी के दौरान यदि लम्बे समय तक स्वच्छता पर ध्यान नहीं दिया जाये तो बच्चेदानी में संक्रमण पहुँच जाता है. इससे गर्भधारण बाधित या खत्म भी हो सकता है.

डॉ सिंह ने बताया कि किशोरावस्था में शरीर और मस्तिष्क का विकास तेजी से होता है. इन बदलावों को समझने और उसे सकारात्मक रूप से लेने के लिए किशोरों को सही सलाह की बहुत जरूरत होती है. उन्होंने बताया कि 11 से 12 साल की किशोरियों में मासिक चक्र की शुरुआत होने लगती ही. बहुत सारी किशोरियों को माहवारी के दौरान सेनेटरी पैड की जरुरत और महत्व के बारे में सटीक जानकारी नहीं होती है. साथ ही संकोच वश वह इस पर अन्य लोगों से चर्चा भी नहीं कर पाती हैं.

यही समय है जब लड़कियों को इस संबंध में उचित सलाह देकर जागरूक किया जाए. इसको लेकर आशा, आंगनवाड़ी कार्यकर्ता एवं एएनएम सामुदायिक स्तर पर किशोरियों एवं महिलाओं को निरंतर जागरूक कर रही हैं एवं माहवारी के दौरान असुरक्षित साधनों के इस्तेमाल की जगह सुरक्षित साधन जैसे सेनेटरी पैड के शत-प्रतिशत इस्तेमाल को सुनिश्चित कर रही हैं.

क्या कहते हैं आँकड़ें:

राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वे-4 के अनुसार राज्य में 15 से 24 साल की कुल 31 प्रतिशत किशोरियों ही माहवारी के दौरान सेनेटरी पैड का इस्तेमाल करती हैं. जबकि शहरी आबादी में 55.6 प्रतिशत एवं ग्रामीण आबादी में मात्र 27.3 प्रतिशत किशोरियाँ ही सेनेटरी पैड का इस्तेमाल कर पाती हैं.

इन बातों का रखें ख्याल :

मासिक धर्म स्वच्छता पर संकोच ना करें एवं इस पर खुल-कर बात करें
सेनेटरी पैड की जगह अन्य कोई असुरक्षित साधन इस्तेमाल ना करें
माताएं किशोरियों को इसके बारे में जानकारी दें
माहवारी के दौरान असुरक्षित साधन इस्तेमाल स्वास्थ्य के लिए हो सकता है हानिकारक

अपनी राय कमेंट बॉक्स में दें
ताज़ा हिंदी समाचार और उनसे जुड़े अपडेट हासिल करने के लिए फ्री मोबाइल एप डाउनलोड करें अथवा हमें फेसबुक, ट्विटर या गूगल पर फॉलो करें