विकास दर: मोदी सरकार के कार्यकाल के सबसे निचले स्तर पर पहुंचने की आशंका

नई दिल्ली। देश की अर्थ व्यवस्था को लेकर मोदी सरकार की मुश्किलें ख़त्म होने का नाम नहीं ले रहीं। बजट से पहले मोदी सरकार को एक और मुश्किल से रूबरू होना पड़ेगा। यह मुश्किल विकास दर को लेकर सामने आयी है जो मोदी सरकार के कार्यकाल के सबसे निचले स्तर पर पहुँचने के आसार है।

देश की विकास दर बीते कारोबारी साल यानी 2016-17 के दौरान विकास दर 7.1 फीसदी रही थी। 31 मार्च को खत्म होने वाले चालू कारोबारी साल 2017-18 के दौरान विकास दर 6.5 फीसदी रहने का अनुमान है। यह चार सालों का सबसे निचला स्तर है, आंकड़ों पर नज़र डाले तो ये मोदी सरकार के कार्यकाल के दौरान सबसे कम विकास दर है।

विकास दर में कमी की आशंका के पीछे दो मुख्य वजह खेती बाड़ी और दूसरा मैन्युफैक्चरिंग बताया जा रहा है। दोनों की ही विकास दर बीते साल के मुकाबले कम रहने के आसार हैं।

सेंट्रल स्टैटिस्टिक्स ऑफिस (CSO) के द्वारा जारी आंकड़ों के मुताबिक सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) 2016-17 में 7.1 प्रतिशत और इससे पिछले वर्ष में 8 प्रतिशत था। 2014-15 में यह 7.5 प्रतिशत था।

इसके अलावा नए आंकड़े में साल 2017-18 के लिए जीवीए यानी ग्रॉस वैल्यू ऐडेड का अनुमान भी घटाकर 6.1 फीसदी कर दिया गया है। पहले आरबीआई ने साल 2017-18 के लिए जीवीए के 6.7 होने का अनुमान लगाया था।

माना जा रहा है कि 8 नवंबर 2016 को घोषित नोटबंदी से आर्थिक गतिविधियों पर असर पड़ा वहीं चालू वित्त वर्ष में 1 जुलाई से जीएसटी भी लागू किया गया।इसके अलावा कृषि (एग्रीकल्चर, फोरेस्ट्री और फिशिंग) की ग्रोथ घटकर 2.11% रहने का अनुमान है, जबकि 2016-17 में यह ग्रोथ 4.9 फीसदी रही थी।

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