वाह बीजेपी सरकार ! गांधी जी के नाम से छाप दिया झूठा विज्ञापन

नई दिल्ली। देश के गांधीवादी विचारधारा से जुड़े लोगों और सामाजिक कार्यकर्ताओं का गुस्सा अपने चरम पर है। कारण हैं कि झारखंड की बीजेपी सरकार ने सांप्रदायिक सन्देश फैलाने के लिए राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के नाम का उपयोग किया। इतना ही नहीं सरकार द्वारा समाचार पत्र के मुख पृष्ठ पर पूरे पेज के विज्ञापन में महात्मा गांधी के नाम से वह सब लिख दिया जो उन्होंने कभी कहा ही नहीं।

आइये आपको झारखण्ड में बीजेपी सरकार की उस करतूत की सच्चाई में ले चलते हैं जहाँ से आपको पता चलेगा कि असल में हुआ क्या है। दिनांक 11 अगस्त 2017 को झारखंड के कई अखबारों के प्रथम पृष्ठ पर राज्य सरकार के विज्ञापन को प्रकाशित किया गया है जिसमें गांधी जी का हवाला देकर एक वक्तव्य प्रकाशित हुआ।

इसमें राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के नाम का उल्लेख करते हुए कहा गया कि “यदि ईसाई मिशनरी समझते हैं कि ईसाई धर्म में धर्मांतरण से ही मनुष्य का आध्यात्मिक उद्धार संभव है तो आप यह काम मुझसे या महादेव देसाई (गांधीजी के निजी सचिव) से क्यों नहीं शुरू करते। क्यों इन भोले-भाले, अबोध, अज्ञानी, गरीब और वनवासियों के धर्मांतरण पर जोर देते हो. ये बेचारे तो ईसा और मोहम्मद में भेद नहीं कर सकते और न आपके धर्मोपदेश को समझने की पात्रता रखते हैं। वे तो गाय के समान मूक और सरल हैं। जिन भोले-भाले, अनपढ़ दलितों और वनवासियों की गरीबी का दोहन करके आप ईसाई बनाते हैं वह ईसा के नहीं (चावल) अर्थात पेट के लिए ईसाई होते हैं।’

गांधी जी के नाम से प्रकाशित किये गए इस कथन की सच्चाई यह है कि यह कथन राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के प्रचारक देवेंद्र स्वरूप की किताब ‘गांधी जी: हिंद स्वराज से नेहरू तक’ से लिया गया है जिसमें धर्मांतरण पर गांधी जी के विचार को संघ के एजेंडे के अनुसार तोड़ मरोड़ के प्रस्तुत किया गया है। यह गांधी जी के शब्द नहीं बल्कि राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ की भाषा है।

इस विज्ञापन के बाद झारखण्ड राज्य की रघुवर दास सरकार गांधीवादी विचारधारा से जुड़े सामाजिक कार्यकर्ताओं के निशाने पर आ गयी है। उनका कहना है कि राष्ट्रपिता ने नाम से मनगढ़ंत वक्तव्य प्रकाशित करवाने के लिए मुख्यमंत्री के खिलाफ कार्रवाही होनी चाहिए।

सामाजिक कार्यकर्ताओं ने झारखंड उच्च न्यायालय से अपील की है कि वे सरकार के इस भड़काउ, गैरसंवैधानिक एवं सांप्रदायिक विज्ञापन पर स्वत: संज्ञान ले क्योंकि झारखंड की कानून व्यवस्था खतरे में पड़ सकती है।

विरोध प्रकट करने वाले कार्यकर्ताओं में सामाजिक कार्यकर्ता स्टने स्वामी, मेघनाथ, ज्यां द्रेेज, बलराम, विनोद सिंह, वास्वी कीड़ो, बीबी चौधरी, जेम्स हेरेंज, सिराज दत्ता, धीरज कुमार, अंकिता अग्रवाल, अफजल अनिस, नदीम खान, आलोका कुजूर, बिन्जू अब्राहम, अंजोर भास्कर, प्रवीण पीटर, जियाउल्ला, देव्माल्या, प्रांजल धांडा और कुमार संजय शामिल हैं।

ताज़ा हिंदी समाचार और उनसे जुड़े अपडेट हासिल करने के लिए फ्री मोबाइल एप डाउनलोड करें अथवा हमें फेसबुक, ट्विटर या गूगल पर फॉलो करें

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *