वाराणसी में तेजबहादुर से क्यों मूँह छिपा रहे हैं राष्ट्रवादी ?

नई दिल्ली(राजाज़ैद)। लोकसभा चुनाव में वाराणसी से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ चुनाव लड़ने का एलान कर चुके सीआरपीएफ से बर्खास्त जवान तेजबहादुर यादव को लेकर विपक्षी दलों ने कोई रूचि नहीं दिखाई है।

समाजवादी पार्टी ने जहाँ वाराणसी लोकसभा सीट पर सपा बसपा गठबंधन के उम्मीदवार के तौर पर शालिनी यादव के नाम का एलान किया है वहीँ कांग्रेस ने पिछले लोकसभा चुनाव में तीसरे नंबर पर आये अजय राय को फिर से उम्मीदवार बनाया है।

वहीँ दूसरी तरफ सीआरपीएफ के पूर्व जवान तेजबहादुर यादव कुछ पूर्व सैनिको के साथ अपने प्रचार में जुटे हुए हैं। हालाँकि धन अभाव के चलते वो अभी पूरी तरह से जनता तक अपनी पहुँच नहीं बना सके हैं लेकिन उनकी कोशिशें जारी हैं।

यहाँ अहम सवाल यही है कि सेना के जवानो को ख़राब भोजन मिलने के खिलाफ आवाज़ बुलंद करने वाले तेजबहादुर को विपक्ष का साथ क्यों नहीं मिला ? चुनाव विश्लेषकों का कहना है कि यदि विपक्ष एकजुट होकर तेज प्रताप का समर्थन करता तो वाराणसी का चुनाव पीएम मोदी की नाक का सवाल बन सकता था।

जानकारों के मुताबिक यदि विपक्ष ने तेजबहादुर का साथ दिया होता वाराणसी की फ़िज़ा बदली हुई होती। इस सीट पर मुकाबला मोदी बनाम तेजबहादुर होता और एक पूर्व सैनिक के सामने बीजेपी को बेहद विपरीत स्थतियों से गुजरना पड़ता।

विपक्ष के रवैये से फ़िलहाल ऐसा लगता है जैसे विपक्ष वाराणसी सीट पीएम मोदी को गिफ्ट करना चाहता है। समाजवादी पार्टी ने शालिनी यादव और कांग्रेस ने अजय राय को टिकिट देकर यह साबित कर दिया है कि उसने वाराणसी में चुनाव से पहले ही हथियार डाल दिए हैं।

यहाँ यह कहना भी आवश्यक है कि बेगूसराय में कन्हैया कुमार के समर्थन में सेलिब्रिटी तक पहुँच रहे हैं, कन्हैया कुमार के लिए क्राउड फंडिंग के ज़रिये ऑनलाइन 70 लाख रुपये का चंदा भी जुटाया गया है लेकिन क्या राष्ट्रवाद और सेना की जय जयकार करने वालो की भीड़ में कोई ऐसा नहीं जो तेज बहादुर के समर्थन के लिए आगे आये ?

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