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वसुंधरा सरकार के अध्यादेश के खिलाफ कांग्रेस का प्रदर्शन, सचिन पायलट सहित कई हिरासत में

जयपुर। राजस्थान की वसुंधरा राजे सरकार ने आज सीआरपीसी में संशोधन वाले बिल को राजस्थान विधान सभा में पेश किया वहीँ इसके खिलाफ कांग्रेस ने विरोध प्रदर्शन किया।

कांग्रेस नेताओं ने काली पट्टी बांधकर प्रदेश अध्यक्ष सचिन पायलट की अगुवाई में अध्यादेश के खिलाफ जयपुर में राजभवन तक शांतिपूर्ण मार्च किया। इस दौरान कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष सचिन पायलट सहित कई नेताओं को पुलिस ने हिरासत में ले लिया।

चिन पायलट ने कहा कि राज्य की बीजेपी की वसुंधरा राजे सरकार ने अपने कार्यकाल के दौरान हुए करप्शन पर पर्दा डालने के लिए ही इस तरह का तुगलकी अध्यादेश लाया है। उन्होंने कहा कि यह बिल भ्रष्टाचार पर ‘मीडिया का गला घोंटने वाला’ है। हम इसके खिलाफ राष्ट्रपति को भी एक ज्ञापन सौंपेंगे।

इससे पहले आज सुबह विधानसभा में बिल पेश होते ही मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस ने इसका पुरजोर विरोध किया, सदन में हंगामा किया और विधान सभा से वॉक आउट किया। इसके बाद हंगामा बढ़ता देख स्पीकर ने सदन की कार्यवाही कल तक के लिए स्थगित कर दी गयी।

गौरतलब है कि वसुंधरा राजे सरकार द्वारा विधानसभा में पेश बिल के पास होने के बाद पूर्व व वर्तमान जजों के साथ सरकारी कर्मचारियों की शिकायत करना आसान नहीं होगा।

बिल के मुताबिक इन लोगों के खिलाफ पुलिस या कोर्ट में शिकायत करने के लिए सरकार की अनुमति लेनी होगी। ड्यूटी के दौरान यदि सरकारी कर्मचारियों के​ खिलाफ कोई शिकायत की जाती है तो उसके खिलाफ सरकार की अनुमति केे बिना कोई एफआईआर दर्ज नहीं हो सकती। वहीं इस नए बिल में 180 दिन की समयावधि भी रखी गई है।

इतना ही नहीं शिकायत होने के बाद सरकारी कर्मचारी या अन्य लोगों के खिलाफ सरकार 180 दिन में निर्णय लेगी। तय समयावधि के बाद अगर कोई निर्णय नहीं आता है तो सबंधित अधिकारी या कर्मचारी के खिलाफ कोर्ट के जरिए ही रिपोर्ट दर्ज कराई जा सकती है।

इस बिल में मीडिया को भी बंदिश में रखा गया है और यदि सरकार की स्वीकृति से पूर्व आरोपी कर्मचारी या अधिकारी का नाम मीडिया रिपोर्ट्स में आता ​है तो ऐसे मामलों में दो वर्ष की सजा का प्रवाधान है। मीडिया रिपोर्ट्स में आरोपी का नाम सरकार की अनुमति के बाद ही आ सकता है।

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