लॉ कमीशन की सलाह: निर्दोष बरी होने वालो को मिले उचित मुआवजा

नई दिल्ली। बेवजह और झूठे मुकदमो में फंसाकर जेल भेजे गए लोगों के निर्दोष साबित होकर बरी होने पर उन्हें उचित मुआवजा मिलना चाहिए। विधि आयोग इस मसौदे पर काम कर रहा है। आयोग ने बेवजह जेल में रहने वालों को उचित मुआवजा देने की पैरवी की है।

इतना ही नही आयोग ने देशद्रोह कानून का दुरुपयोग रोकने पर भी जोर दिया। विधि आयोग ने अपनी ताजा रिपोर्ट में सिफारिश की है कि जिन लोगों को रंजिशन या किसी और कारण से झूठे केसों में फंसाकर जेल भेज दिए जाता है ऐसे लोगों के निर्दोष छूटने पर उन्हें उचित मुआवजा दिया जाना चाहिए।

आयोग ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि झूठे मुकदमो में जेल पहुँचने से उस व्यक्ति की इज्ज़त तो जाती ही है साथ ही उसे शारीरिक और मानसिक प्रताड़ना भी झेलनी पड़ती है। इतना ही नही बेकसूर होने के बावजूद उसे अपने जीवन का अहम समय जेल की सलाखों के पीछे कारण पड़ता है और उसके परिजन भी साथ में यातनाएं झेलते हैं। इसके अलावा मुकदमे की पैरवी में फिजूल की धन हानि भी होती है।

विधि आयोग का कहना है कि ये सिर्फ कहने की बातें हैं. कोई भी गुजरे हुए दिन, इज्जत और मानसिक शांति नहीं लौटा सकता। हां, समुचित मुआवजा देकर उसके संताप को जरूर कम किया जा सकता है।

विधि आयोग ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि आईसीसीपीआर के अनुच्छेद 14 (6) और संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार घोषणापत्र की धारा 32 के मुताबिक भी मुआवजा तो बनता ही है। सवाल ये भी है कि मुआवजा समय रहते मिले, क्योंकि गैरकानूनी हिरासत या कैद अदालत में गलत और गैरकानूनी साबित होती है तो मुलजिम के लिए भारतीय न्यायिक व्यवस्था में फिलहाल मुआवजे का ना तो कोई प्रावधान है ना ही अधिकार और ना ही इसके लिए किसी तरह के मुकदमे की गुंजाइश।

रिपोर्ट के मुताबिक आयोग ने कहा कि किसी निर्दोष के जीवन को नरक बनाने की इस घोर लापरवाही के लिए मुआवजा अदा करना अब तक सरकार, राज्य या शासन के लिए वैधानिक अनिवार्यता नहीं है. इसे सुनिश्चित करने की सिफारिश आयोग ने की है।

आयोग ने अपनी रिपोर्ट में स्पेशल कोर्ट बनाने और निश्चित समय सीमा में ऐसे दावे निपटाने, मुआवजा तय करने की सिफारिश की है। इसके अलावा जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई करने, मुआवजे का दावा करने और ये तय करने की जिम्मेदारी सरकार पर डाली है कि कौन लोग, किस परिस्थितियों में और कैसे मुआवजे का दावा कर सकते हैं।

फ़िलहाल देखना है कि लॉ कमीशन के इन सुझावो पर सरकार का क्या रुख रहता है। यदि सरकार सरकार लॉ कमीशन के इन सुझावों को मानती है तो इससे निश्चित तौर पर झूठे मुकदमे लगाकर जेल भेजे जाने की घटनाओं में कमी आएगी।

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