राहुल चाहते तो जीत सकता था विपक्ष का उम्मीदवार !

नई दिल्ली। राज्य सभा के उपसभापति पद के लिए हुए चुनाव में भले ही संयुक्त विपक्ष को नाकामी हाथ लगी हो लेकिन इसके बावजूद विपक्ष अब भी एक है।

वहीँ विपक्ष के बीच इस बात को लेकर चर्चाएं हो रही हैं कि यदि एनडीए उम्मीदवार को जिताने के लिए पीएम नरेंद्र मोदी एनडीए दल के नेताओं को फोन कर सकते हैं तो कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने अपनी ही पार्टी के उम्मीदवार को जिताने के लिए विपक्षी दलों के नेताओं से फोन पर सम्पर्क क्यों नहीं किया।

तृणमूल कांग्रेस के नेता डेरेक ओ ब्रायन ने संवाददाताओं से कहा, भाजपा और राजग के खिलाफ हम अब भी एकजुट हैं। उन्होंने कहा कि आज का परिणाम सरकार की हताशा को दर्शाता है।

डेरेक ओ ब्रायन ने कहा कि राजग उम्मीदवार के लिए वोट मांगने की खातिर प्रधानमंत्री को फोन करना पड़ा। निश्चित तौर पर चुनाव हमारे लिए दुनिया का अंत नहीं है। ये विश्व कप के लिए महज तैयारी मैच हैं और यह खेला जाना चाहिए तथा वहां मतदाता भिन्न हैं।

वहीँ सूत्रों की माने तो कांग्रेस के अंदर भी इस बात को लेकर चर्चाएं गर्म हैं कि यदि राहुल गांधी चाहते तो विपक्ष के उम्मीदवार को अधिक मत मिल सकते थे।

सूत्रों के मुताबिक कांग्रेस नेताओं की राय में यदि उपसभापति पद के लिए कांग्रेस ने अपना उम्मीदवार न खड़ा करके टीडीपी या किसी और विपक्षी दल का उम्मीदवार खड़ा किया होता तो बीजू जनता दल और आप आदमी पार्टी के सदस्यों के भी वोट हासिल किये जा सकते थे। यदि ऐसा हुआ होता तो एनडीए के लिए जटिल स्थति पैदा हो सकती थी।

आप नेता संजय सिंह ने कहा, नीतीश कुमार ने अरविन्द केजरीवाल को फोन कर राजग उम्मीदवार के लिए समर्थन मांगा, लेकिन केजरीवाल ने इनकार कर दिया। यदि नीतीश कुमार फोन कर सकते हैं तो राहुल गांधी क्यों नहीं। आम आदमी पार्टी मतदान से अनुपस्थिति रही। राज्यसभा में इसके तीन सदस्य हैं।

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