राहुल गांधी की नई स्क्रिप्ट का तोड़ ढूंढने में जुटे बीजेपी के चाणक्य

नई दिल्ली। राहुल गांधी गुजरात में अपने भाषणों में जिस तरह की भाषा का उपयोग कर रहे हैं वह जनता के दिमाग में सीधे सीधे उतर रही है। यही कारण है कि इस बार राहुल गांधी की सभाओं में पिछले चुनावो से कहीं अधिक भीड़ जुट रही है। वहीँ बीजेपी के चाणक्य अब राहुल की नई स्क्रिप्ट का तोड़ ढूंढने में जुट गए हैं।

जानकारों के अनुसार राहुल गांधी इस बार गुजरात में जो कुछ कह रहे हैं वो पहले की तुलना में काफी बदला हुआ है। वे अपने भाषणों में महाभारत से उदाहरण कोट कर रहे हैं। वे ऐसे मुद्दे उठा रहे हैं जो ज़मीनी स्तर पर कहीं न कहीं जनता को प्रभवित करते हैं।

सबसे अहम बात यह है कि गुजरात में राहुल गांधी यूपी चुनावो वाली गलतियां नहीं दोहरा रहे। वे किसानो की सभा में चिप्स और फ़ूड प्रोसैसिंग की बात नहीं कर रहे। वे उत्तर प्रदेश चुनाव की तरह गुजरात में किसानो को चिप्स की फैक्ट्री लगाने की सलाह नहीं दे रहे बल्कि वे किसानो के हक का मुद्दा उठा रहे हैं। वे किसानो को बता रहे हैं कि किस तरह उनकी बजली, पानी और ज़मीने लेकर उधोगपतियों को फायदा पहुंचाया जा रहा है।

जानकारों का मानना है कि राहुल गांधी में पहले से बड़ा परिवर्तन आया है और यह परिवर्तन उनके भाषणों में धार पैदा कर रहा है। गुजरात में राहुल गांधी अपना भाषण एक ख़ास वर्ग या केटेगरी पर केंद्रित करने की जगह बड़े मुद्दों को उठा रहे हैं। वे किसानो से लेकर वेरोज़गार युवाओं और कारोबारियों से लेकर महिला अधिकारों से जुड़े मामलो पर फोकस कर रहे हैं।

वहीँ बड़े चेहरे मौजूद होने के बावजूद बीजेपी इस बार राहुल गांधी की काट नहीं ढूंढ पायी है। अभी हाल ही में केंद्रीय मंत्री मुख़्तार अब्बास नक़वी द्वारा कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी को लेकर दिया गया बयान दर्शाता है कि इस बार बीजेपी के पास मुद्दों का अकाल पड़ गया है इसलिए बीजेपी नेताओं ने अभी से गैर मर्यादित भाषा का इस्तेमाल करना शुरू कर दिया है।

जानकारों का कहना है कि गुजरात चुनाव का परिणाम जो भी हो लेकिन इस बार प्रतिष्ठा राहुल गांधी की नहीं बल्कि नरेंद्र मोदी की दांव पर है। यदि कांग्रेस गुजरात फतह करती है तो बीजेपी के कांग्रेस मुक्त भारत बनाने के दावे की हवा निकल जायेगी बल्कि इसका सन्देश पूरे देश में जाएगा।

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