राष्ट्रपति शासन की तरफ जम्मू कश्मीर, महबूबा बोलीं ‘जम्मू-कश्मीर में सख्ती नीति नहीं चलेगी’

नई दिल्ली। जम्मू कश्मीर की पीडीपी-भाजपा गठबंधन सरकार से भाजपा के समर्थन वापस लेने के बाद राज्य में राष्ट्रपति शासन लगना तय माना जा रहा है। महबूबा मुफ्ती ने राज्यपाल को इस्तीफा सौंपने के बाद नेशनल कॉन्फ्रेंस के नेता उमर अब्दुल्ला ने राज्यपाल से मुलाकात के बाद एलान किया कि उनकी पार्टी किसी को समर्थन नहीं देगी।

वहीँ कांग्रेस की तरफ से साफ़ तौर पर पीडीपी को समर्थन देने से इंकार कर दिया गया है। कांग्रेस नेता गुलाम नबी आज़ाद ने कहा कि जम्मू कश्मीर में पीडीपी को समर्थन देने का कोई प्रश्न ही नहीं उठता।

उधर, पीडीपी से नाता तोड़ने का ऐलान करते हुए भाजपा के महासचिव राम माधव ने राज्य में राष्ट्रपति शासन को फिलहाल सबसे बेहतर विकल्प बताया है।
पूर्व मुख्यमंत्री तथा नेशनल कॉन्फ्रेंस के नेता उमर अब्दुल्ला ने राज्यपाल एनएन वोहरा से श्रीनगर में मुलाकात करने के बाद पत्रकारों से कहा कि राज्य में सरकार बनाने के लिए नेशनल कॉन्फ्रेंस किसी के साथ नहीं जाएगी।

गौरतलब है कि 2014 में नेशनल कांफ्रेंस ने पीडीपी को समर्थन की पेशकश की थी। इस बारे में उमर अब्दुल्ला ने कहा कि वह वन टाइम ऑफर था जो पीडीपी के भाजपा से हाथ मिलाने के साथ ही खत्म हो गया। दोनों पार्टियों का नाता टूटने पर प्रतिक्रिया देते हुए उन्होंने कहा कि इसमें कुछ भी आश्चर्यजनक नहीं है। उन्हें साल के आखिर में ऐसा होने की उम्मीद थी, यह कुछ पहले ही हो गया है।

राज्यपाल से मुलाकात के बारे में उमर अब्दुल्ला ने कहा कि उन्होंने जल्द से जल्द चुनाव कराने की मांग की है। अब लोगों को अपनी पसंद की सरकार चुनने का मौका दिया जाना चाहिए। पिछले चुनाव में हमें जनादेश नहीं मिला था, अब भी हमारे पास बहुमत नहीं है। नेशनल कांफ्रेंस किसी को समर्थन देने नहीं जा रही है। हम किसी के साथ गठबंधन नहीं करने जा रहे हैं। हमने राज्यपाल से कहा है कि हमारी पार्टी राज्यपाल को पूरा समर्थन देगी लेकिन राज्य में ज्यादा समय तक राज्यपाल शासन नहीं रहना चाहिए।

क्या बोलीं महबूबा :

बीजेपी द्वारा सरकार से समर्थन वापस लिए जाने के बाद अपना इस्तीफा राज्यपाल को सौंपने के बाद पीडीपी प्रमुख महबूबा मुफ्ती ने कहा कि जम्मू-कश्मीर में सख्ती नीति नहीं चलेगी। उन्होंने कहा कि दोनों पार्टियां अलग-अलग विचारधारा को मानती हैं, लेकिन फिर भी बड़े विजन को साथ लेकर बीजेपी के साथ गठबंधन किया गया था।

महबूबा ने कहा कि सरकार के जरिये उन्होंने कश्मीर में अपना एजेंडा लागू करवाने में सफल रही हैं. महबूबा का कहना है कि कश्मीर के लोगों से बातचीत होनी चाहिए, पाकिस्तान से बातचीत होनी चाहिए, ये उनकी हमेशा कोशिश रही। उन्होंने कहा कि धारा 370 को लेकर डरे हुए थे उसको लेकर हम अब तक डटे रहे। 11 हजार लोगों के खिलाफ जो केस दर्ज था उसे वापस लिया गया। यही नहीं, महबूबा की मानें तो उनकी सफल नीति की वजह से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पाकिस्तान भी गए।

क्या है विधानसभा का गणित:

87 विधायकों वाली जम्मू एवं कश्मीर विधानसभा में सबसे ज्यादा 28 विधायक महबूबा मुफ्ती की पीडीपी के पास हैं। जबकि मोदी लहर में भाजपा ने 25 सीटें जीतने में कामयाबी हासिल की थी। नेशनल कांफ्रेंस के पास 15 और कांग्रेस के पास 12 विधायक हैं। इनके अलावा जम्मू एंड कश्मीर पीपल्स कांफ्रेंस के दो, तीन निर्दलीय और पीपल्स डेमोक्रेटिक फंट व सीपीएम का एक-एक विधायक है। यानी अगर कांग्रेस या नेशनल कांफ्रेंस में से कोई एक पार्टी और बाकी सभी छोटी पार्टियां और निर्दलीय पीडीपी को समर्थन दें तो सरकार बन सकती है। हालांकि, राज्य के मौजूदा सियासी हालत में पीडीपी को बाकी दलों का समर्थन मिलने की गुंजाइश बेहद कम नजर आ रही है।

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