राफेल मामले में घिरी सरकार, पीएम मोदी के खिलाफ एफआईआर कराने पहुंचे आप सांसद

नई दिल्ली। राफेल डील को लेकर ‘द हिन्दू’ में प्रकाशित एक रिपोर्ट के बाद सरकार को सफाई देनी पड़ रही है। जहाँ आज इस मामले में संसद में विपक्ष ने सरकार की घेरबंदी की वहीँ रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण ने अख़बार में प्रकाशित रिपोर्ट को ख़ारिज करते हुए इसे गड़े मुर्दे उखाड़ने और विपक्ष के बहुराष्ट्रीय कंपनियों के हाथो में खेलने का आरोप जड़ा।

राफेल डील को लेकर हो रहे खुलासे के बाद अब सरकार घिरती नज़र आ रही है। आम आदमी पार्टी के सांसद संजय सिंह राफेल डील में कथित अनियमितताओं और भ्रष्टाचार की शिकायत लेकर शुक्रवार को दिल्ली के नार्थ एवेन्यू पुलिस स्टेशन पहुंचे और उन्होंने राफेल डील को लेकर पुलिस को अपनी शिकायत दी। शिकायत में पीएम नरेंद्र मोदी के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की मांग की गयी है।

आप सांसद संजय सिंह ने राफेल डील मामले में सामने आए नए दस्तावेजों को आधार बनाकर सीबीआई से जांच की गुहार लगाई है। थाने पहुंचने से पहले संजय सिंह ने कहा कि राफेल विमान की खरीद में गड़बड़ी को लेकर सीवीसी, सीबीआई और कैग के समक्ष पिछले साल उनके द्वारा पेश किए गए तथ्यों की एक बार फिर पुष्टि हो गई है।

उन्होंने कहा कि इससे राफेल डील में घोटाले को लेकर लगाए जा रहे आरोपों की पुष्टि होती है और इसमें पीएम मोदी के खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए। वहीँ दूसरी तरफ दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल ने भी राफेल डील पर पीएम नरेंद्र मोदी के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है।

केजरीवाल ने ट्वीट कर कहा कि ‘राफेल पर आज हुए खुलासे के बाद स्वतंत्र सीबीआई ने जैसे मेरे और कोलकाता पुलिस आयुक्त के कार्यालय पर छापेमारी की वैसे ही वह प्रधानमंत्री कार्यलय पर छापेमारी करे और राफेल से संबंधित सभी फाइलों को जब्त कर उन्हें (पीएम मोदी) गिरफ्तार करे।

गौरतलब है कि अंग्रेजी अख़बार ‘द हिन्दू’ में राफेल डील को लेकर प्रकाशित एक रिपोर्ट में दावा किया गया है कि राफेल डील को प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) ने दखल दिया था। रिपोर्ट के मुताबिक रक्षा मंत्रालय द्वारा की गयी डील में प्रधानमंत्री कार्यालय के दखल के चलते फ़्रांस को फायदा पहुंचा।

रिपोर्ट में कहा गया है कि 7.87 बिलियन डॉलर के विवादित राफेल डील पर दोनों देशों की ओर से शीर्ष स्तर पर हो रही बातचीत में पीएमओ के ‘सामानांतर दखल’ का भारतीय रक्षा मंत्रालय ने जमकर विरोध किया था। पीएमओ के ‘सामानांतर दखल’ के कारण रक्षा मंत्रालय और रक्षा मंत्रालय की टीम सौदे को लेकर बातचीत कमजोर पड़ गई। 24 नवंबर, 2015 को इसे रक्षा मंत्री मनोहर पर्रिकर के संज्ञान में लाया गया।

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