राफेल डील में भ्रष्टाचार के अलावा राष्ट्रीय सुरक्षा से भी किया गया खिलवाड़

नई दिल्ली। वरिष्ठ अधिवक्ता प्रशांत भूषण का दावा है कि राफेल विमान डील में बरती गयी अनियमितताएं देश की सुरक्षा के साथ बड़ा खिलवाड़ हैं। उन्होंने कहा कि राफेल लड़ाकू विमान करार के मामले में वित्तीय भ्रष्टाचार और राष्ट्रीय सुरक्षा से समझौता दोनों पहलू हैं जबकि बोफोर्स कांड में ऐसा नहीं था।

प्रशांत भूषण ने एक सम्मेलन में कहा कि ‘राफेल करार में न केवल भ्रष्टाचार हुआ, बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा से समझौता भी हुआ। बोफोर्स कांड 64 करोड़ रुपए के कमीशन का मामला था, लेकिन उसमें राष्ट्रीय सुरक्षा से समझौते का पहलू नहीं था।

जब उनसे पूछा गया था कि क्या राफेल मुद्दे की तुलना बोफोर्स कांड से की जा सकती है? तो उन्होंने कहा कि राफेल करार में 20,000 करोड़ रुपए का घोटाला हुआ है और राष्ट्रीय सुरक्षा से भी समझौता किया गया है।

गौरतलब है कि कांग्रेस सहित विपक्ष मोदी सरकार पर राफेल करार को बदलने, महंगे विमान खरीदने और रिलायंस डिफेन्स को फायदा पहुंचाने के आरोप लगा रहे हैं। अब यह मामला सुप्रीमकोर्ट तक पहुँच गया है। इस मामले में सुप्रीमकोर्ट में याचिकाओं पर सुनवाई चल रही है।

2 नवंबर को कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने राफेल विमान सौदे को लेकर एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में आरोप लगाया कि दसॉल्ट के सीईओ इस पूरे मामले पर साफ झूठ बोल रहे हैं। घाटे वाली अनिल अंबानी की कंपनी में 284 करोड़ रुपये क्‍यों दिए गए। प्रधानमंत्री को रात को नींद नहीं आ रही है, टेंशन है और पकड़े जायेंगे। इसलिए सीबीआई मुखिया को हटाया गया।

उन्होंने कहा कि आठ लाख की कंपनी में 284 करोड़ रुपये का निवेश करना मुझे समझ में नहीं आता है। अनिल अंबानी की कंपनी के पास तो जमीन भी नहीं थी, जो पैसा दसॉल्ट ने दिया उसी पैसे से उन्होंने जमीन खरीदी।

राहुल गांधी ने कहा कि अंबानी की कंपनी को जानबूझकर फायदा पहुंचाया गया। दसॉल्ट कंपनी को मोदी सरकार बचा रही है। हमारा काम केवल देश को सच बताना है। ये क्लीयर कट केस ऑफ करप्शन है। बहुत जल्‍द सच बाहर आएगा।

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