राफेल डील पर कैग रिपोर्ट पेश करने की तैयारी में सरकार, कांग्रेस ने उठाये ये सवाल

नई दिल्ली। राफेल डील पर हो रहे खुलासो के बीच कल सरकार सीएजी (कैग) रिपोर्ट पेश करने की तैयारी कर रही है वहीँ कांग्रेस ने एक दिन पहले ही मौजूदा सीएजी राजीव महर्षि को लेकर सवाल उठाये हैं।

दिल्ली के कांग्रेस मुख्याल में रविवार को प्रेस से बात करते हुए पार्टी के वरिष्ठ नेता कपिल सिब्बल ने कहा कि जिस वक्त 2015 में राफेल डील बदली गई थी। और फ्रांस सरकार के साथ पीएम मोदी ने नई डील की थी, उस वक्त राजीव महर्षि वित्त सचिव थे।

उन्होंने कहा कि इस तरह के डील में वित्त सचिव का अहम रोल होता है। उन्होंने कहा कि तत्कालीन वित्त सचिव और मौजूदा सीएजी राजीव महर्षि इस मामले में रिपोर्ट कैसे पेश कर सकते हैं।

सिब्बल ने कहा कि अगर उनके द्वारा तैयार रिपोट संसद में पेश की जाती है तो यह अपने आप में एक बड़ा घोटाला होगा। सिब्बल ने कहा कि राजीव महर्षि को इस रिपोर्ट से खुद को अलग कर लेना चाहिए।

सिब्बल ने कहा कि राजीव महर्षि 24 अक्टूबर, 2014 को वित्त सचिव नियुक्त किए गए और 30 अगस्त 2015 तक वित्त सचिव रहे। सिब्बल ने कहा कि इसी बीच पीएम मोदी अप्रैल 2015 को फ्रांस गए थे, तभी उन्होंने राफेल विमान खरीदने का ऐलान किया था। सिब्बल ने कहा कि उस समय राजीव महर्षि वित्त सचिव थे।

सिब्बल ने कहा कि इस तरह के समझौते में वित्त मंत्रालय का अहम रोल रहता है। उस समझौते में व्यापार नियमों के मुताबिक, वित्त मंत्रालय शामिल रहती है। उन्होंने कहा कि जाहिर है कि जो भी रिपोर्ट उस वक्त बनी होगी उसमें राजीव मर्षि शामिल थे। सिब्बल ने कहा कि राजीव महर्षि इस रिपोर्ट में पहले खुद को बचाएंगे। इसके बात वे सरकार को बचाएंगे।

कांग्रेस नेता ने कहा, “करीब 58 हजार करोड़ रुपये के 36 राफेल विमान खरीदे गए, इससे देश की संपत्ति को नुकसान हुआ है। इस डील में भष्टाचार हुआ है, इसलिए इसकी जांच होनी चाहिए। लेकिन, सीएजी जांच कैसे करेंगे। अपने खिलाफ तो जांच कर नहीं सकते। वित्त सचिव रहते हुए जो उन्होंने फैसले लिए, उस फैसले के खिलाफ तो वे जांच नहीं कर सकते। राजीव महर्षि इस पद पर बैठे हुए हैं।”

सिब्बल ने कहा, “कमाल की बात यह है कि जब इस मालमे में सुप्रीम कोर्ट में बहस हुई थी। सुप्रीम कोर्ट ने दिसंबर 2018 में इस पर फैसला दिया। उस वक्त कोर्ट ने अपने फैसले में लिखा कि राफेल पर सीएजी की रिपोर्ट संसद में आ चुकी है।”

कांग्रेस नेता ने कहा, “यह बात कोर्ट को याचिका दाखिल करने वालों ने तो नहीं बताई होगी, जाहिर है यह बात कोर्ट को सरकार ने बताई थी। शायद सरकार को इस बात के बारे में जानकारी थी कि सीएजी की रिपोर्ट में क्या है। हालांकि उस समय यह रिपोर्ट संसद में पेश नहीं हुई थी।”

गौरतलब है कि बजट सत्र समाप्त होने को है, इसलिए माना जा रहा है कि सरकार सत्र समाप्त होने से पहले राफेल डील को लेकर सीएजी रिपोर्ट संसद के पटल पर रखकर इस मामले को दफन करना चाहेगी।

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