राफेल डील: दसॉल्ट के सीईओ का दावा- राफेल डील में रिलायंस सिर्फ 10% साझेदार

नई दिल्ली। राफेल डील में रिलायंस की भूमिका को लेकर एक फ्रेंच वेबसाइट के खुलासे के बाद दसॉल्ट कम्पनी ने सफाई दी है। दसॉल्ट के सीईओ का दावा है कि राफेल डील में रिलायंस की सिर्फ 10% साझेदारी है।

दसॉल्ट के सीईओ एरिक ट्रैफियर ने साफ किया कि अंग्रेजी के ‘OFFSET’ शब्द को फ्रेंच में ‘COMPENSATION’ कहा जाता है और इस डील में रिलायंस का इन्वेस्टमेंट सिर्फ 10% है।

रिलायंस से समझौता भारत के कानून के तहत ही हुआ और पूरी तरह दसॉल्ट का फैसला था। कानून के तहत ही दसॉल्ट ने रिलायंस के साथ नागपुर में प्लांट बनाने का फैसला किया।

ट्रैफियर ने कहा कि हमारी बातचीत 100 से ज्यादा कंपनियों से जारी है और 30 कंपनियों के साथ साझेदारी भी हो चुकी है। सरकारी कंपनी HAL की जगह रिलायंस को चुनने पर एरिक ने कहा, ‘रिलायंस के साथ मिलकर दसॉल्ट भारत में लंबी साझेदारी करना चाहता था इसलिए ये फैसला लिया गया।’

वहीँ केंद्रीय रक्षा मंत्री निर्मला सीता रमण फ़्रांस पहुँच चुकी है। निर्मला सीतारमण ने अचानक फ्रांस दौरे को लेकर राहुल गांधी के आरोपों को खारिज किया। उन्होंने कहा, ‘दसॉल्ट कंपनी ने फ्रांस आने के लिए आमंत्रित किया था, क्योंकि हम खरीदार हैं। ऐसे में हमें निसंदेह फ्रांस आना पड़ेगा और सारी चीजों को देखना पड़ेगा।’

रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण ने गुरुवार को पेरिस में प्रेस कॉन्फ्रेंस में सरकार की बात दोहराई। उन्होंने कहा कि यह हमें नहीं पता था कि दसॉल्ट एविएशन अनिल अंबानी के रिलायंस ग्रुप के साथ टीम बना रहा है।

सीतारमण ने कहा कि फ्रांस की सरकार के साथ हमारी सोच एकदम साफ है। हमने 36 राफेल विमान के साथ-साथ उनकी मेंटनेंस की भी डील की है। वहीं, इस डील में किसी खास कंपनी का जिक्र नहीं किया गया।

इससे पहले गुरुवार को एक फ्रैंच मैग्जीन ने दावा किया था कि राफेल के लिए सिर्फ रिलायंस का नाम भेजा गया। वहीं, कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री मोदी ने डील में अनिल अंबानी की कंपनी को 30% कंपनसेशन दिलवाया।

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