राज्य सभा लाइव: सामान्य वर्ग के लिए दस फीसदी आरक्षण बिल पास

नई दिल्ली। सामान्य वर्ग के लिए आर्थिक आधार पर शिक्षा और रोज़गार में दस फीसदी आरक्षण के प्रावधान वाले संविधान संशोधन विधेयक राज्यसभा में भी पास हो गया है। इससे पहले मंगलवार को यह बिल लोकसभा में पास हो गया था।

इससे पहले संविधान में संशोधन करने वाले इस बिल को सेलेक्ट कमेटी के पास भेजे जाने का प्रस्ताव राज्य सभा में गिर गया। इस प्रस्ताव के पक्ष के खिलाफ 174 में से 155 ने खिलाफ वोट किया।

लोकसभा और राज्य सभा में इस संशोधन प्रस्ताव के पास होने के बाद अब बिल राष्ट्रपति की मंजूरी के लिए भेजा जाएगा। इसके बाद इसे कानूनी जामा पहनाने की प्रक्रिया शुरू होगी।

इससे पहले आज राज्य सभा में सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच संशोधन पर जमकर बहस हुई। राज्य सभा में कांग्रेस नेता कपिल सिब्बल और आनंद शर्मा ने मोर्चा संभाला। कपिल सिब्बल ने सरकार से पूछा कि यदि आठ लाख सालाना कमाने वाला गरीब है उसे आरक्षण की आवश्यकता है तो फिर उसे इन्कमटेक्स के दायरे में क्यों लाया गया है।

वहीँ कांग्रेस नेता आनंद शर्मा ने सरकार की मंशा पर सवाल उठाते हुए कहा कि सरकार पूरे पौने पांच साल तक सोती रही और अब जब चुनाव करीब आ रहा है तो उसकी नींद टूटी है। उन्होंने कहा कि दस फीसदी आरक्षण के लिए संविधान में संशोधन के लिए लाया गया बिल इतनी जल्दबाज़ी में लाया गया है कि इससे सरकार की मंशा पर सवाल उठना लाजमी है।

वहीँ सत्ता पक्ष की तरफ से बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह, कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद, और केंद्रीय खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति मंत्री रामविलास पासवान ने भी चर्चा में भाग लिया। राज्य सभा में इस बिल का आरजेडी ने विरोध किया।

सुप्रीमकोर्ट में इसलिए अटक सकता है कानून :

आर्थिक आधार पर आरक्षण लागू करने से पहले सरकार को कोर्ट में बताना पड़ेगा कि इससे लाभान्वित होने वाले वर्ग कौन से होंगे और उन्हें आरक्षण की आवश्यकता क्यों है। सरकार ने अब तक जनगणना के आंकड़े जारी नहीं किए। इसलिए अभी इस बात का कोई आंकड़ा नहीं है कि जो सामान्य वर्ग है, उसमें एक तबके को आरक्षण की ज़रूरत है। ऐसे में सरकार का कदम मनमाना माना जाएगा।

कोर्ट पहले भी बिना आंकड़ों के अलग-अलग जातियों को आरक्षण दिए जाने के प्रावधान को रद्द कर चुका है। इसमें हरियाणा में जाट आरक्षण, गुजरात में आर्थिक आधार पर दिया गया आरक्षण शामिल है।

इसलिए सरकार के सामने बड़ी चुनौती रहेगी कि वो इस जरूरत को साबित कर सके कि सामान्य कोटे में से 10 फ़ीसदी आरक्षण क्यों दिया गया। इन चुनौतियों से पार पाने के बाद सामान्य वर्ग के गरीबों को आरक्षण देने का नया कानून कोर्ट की कसौटी पर खरा उतर सकता है।

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