राज्य सभा लाइव: पासवान के बयान पर हंगामा

नई दिल्ली। सामान्य वर्ग के लिए आर्थिक आधार पर शिक्षा और रोज़गार में दस फीसदी आरक्षण के प्रावधान वाले संविधान संशोधन विधेयक पर राज्यसभा में चर्चा में भाग लेते हुए लोकजनशक्ति पार्टी के नेता रामविलास पासवान के उस बयान पर हंगामा हुआ जिसमे उन्होंने पूर्व पीएम डा मनमोहन सिंह और बसपा सुप्रीमो मायावती का नाम लिया।

चर्चा में भाग लेते हुए रामविलास पासवान ने कहा कि मैं नहीं जानता कि मनमोहन सिंह जी किस जाति के हैं, लेकिन वह ऊंची जाति के ही होंगे। आज एक गरीब तबके का आदमी ऊंची जाति के गरीबों के लिए आरक्षण की बात कर रहा है तो पेट में दर्द हो रहा है।

इस दौरान पासवान ने बसपा प्रमुख मायावती के नाम का भी उल्लेख किया तो पलटवार करते हुए बसपा सांसद सतीशचंद्र मिश्र ने कहा कि आप भी यहाँ उन्ही की वजह से हैं।

इसलिए अटक सकता है कानून :

आर्थिक आधार पर आरक्षण लागू करने से पहले सरकार को कोर्ट में बताना पड़ेगा कि इससे लाभान्वित होने वाले वर्ग कौन से होंगे और उन्हें आरक्षण की आवश्यकता क्यों है। सरकार ने अब तक जनगणना के आंकड़े जारी नहीं किए। इसलिए अभी इस बात का कोई आंकड़ा नहीं है कि जो सामान्य वर्ग है, उसमें एक तबके को आरक्षण की ज़रूरत है। ऐसे में सरकार का कदम मनमाना माना जाएगा।

कोर्ट पहले भी बिना आंकड़ों के अलग-अलग जातियों को आरक्षण दिए जाने के प्रावधान को रद्द कर चुका है। इसमें हरियाणा में जाट आरक्षण, गुजरात में आर्थिक आधार पर दिया गया आरक्षण शामिल है।

इसलिए सरकार के सामने बड़ी चुनौती रहेगी कि वो इस जरूरत को साबित कर सके कि सामान्य कोटे में से 10 फ़ीसदी आरक्षण क्यों दिया गया। इन चुनौतियों से पार पाने के बाद सामान्य वर्ग के गरीबों को आरक्षण देने का नया कानून कोर्ट की कसौटी पर खरा उतर सकता है।

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