राज्य सभा में गुलाम नबी आज़ाद के तीखे प्रहार: ये सरकार गेम चेंजर नहीं नेम चेंजर है

नई दिल्ली। राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पर चर्चा में भाग लेते हुए राज्य सभा में विपक्ष के नेता गुलाम नबी आज़ाद ने मोदी सरकार पर तीखे प्रहार किये। उन्होंने कहा कि ये सरकार गेम चेंजर नहीं बल्कि नेम चेंजर है।

आज़ाद ने उन योजनाओं के नाम भी गिनाये हो कांग्रेस शासनकाल में शुरू हुईं और मोदी सरकार ने उनके नाम बदल दिए। आज़ाद ने कहा कि इन्होने तो भारत का नाम भी बदलकर न्यू इंडिया कर दिया। आज़ाद ने कहा कि हमे नया इंडिया नहीं चाहिए और देश को पुराना भारत ही लौटा दिया जाए जहां सामाजिक और सांप्रदायिक सद्भाव हो।

गुलाम नबी आजाद ने कहा कि इस सरकार ने समाज को विभिन्न हिस्सों में बांट दिया है। सरकार ने पहले विपक्ष की पार्टियों को बांट दिया और फिर शिया और सुन्नी में बांट दिया गया तथा अब परिवारों को बांटने की कोशिश कर रही है।

उन्होंने कहा कि हम चाहते हैं कि इस नए भारत के बदले हमें पुराना भारत ही लौटा दिया जाए। हमें महात्मा गांधी का भारत चाहिए जहां हिंदू और मुस्लिम एक दूसरे के लिए खून दें और जहां लोगों में डर तथा खौफ नहीं हो।

उन्होंने कहा कि नेताओं को फोन टैपिंग का भी भय है। उन्होंने छोटी छोटी बच्चियों के साथ दुष्कर्म की कई घटनाओं का भी जिक्र किया और कहा कि सरकार ने इसे रोकने के लिए कोई कदम नहीं उठाया है।

कश्मीर मुद्दे का जिक्र करते हुए आजाद ने कहा कि इस मुद्दे पर पूरा देश, सभी पार्टियां आपके साथ है। उन्होंने कहा कि 2014 के आम चुनाव के पहले बीजेपी तत्कालीन यूपीए सरकार पर कमजोर सरकार होने का आरोप लगाती थी, लेकिन जम्मू कश्मीर में सीमाओं पर जो स्थिति है, उससे लगता है कि यह पिछले 70 साल की सबसे कमजोर सरकार है।

गुलाम नबी आज़ाद ने कहा कि पाकिस्तान द्वारा बार-बार संघर्षविराम का उल्लंघन किया जा रहा है और बडी संख्या में हमारे जवान तथा आम नागरिक मर रहे हैं।

आज़ाद ने कहा कि इस सरकार की बुनियाद जिसके आधार पर बनी, उनमें 2-जी मुद्दे की अहम भूमिका थी और सैंकड़ों सभाओं में तत्कालीन यूपीए सरकार को काफी भ्रष्ट बताया गया। लेकिन अब सीबीआई अदालत ने उसी 2-जी मामले में सभी आरोपियों को बरी कर दिया है।

उन्होंने कहा कि बोफोर्स भी ऐसा ही मामला था जिसमें कांग्रेस के खिलाफ तत्कालीन सभी विपक्ष एक हो गया था। उन्होंने इस क्रम में पूर्व प्रधानमंत्री दिवंगत वी पी सिंह का भी नाम लिया और कहा कि वह हर सभा में एक कागज निकाल कर दिखाते थे। लेकिन बोफोर्स मुद्दे पर विपक्ष की कई सरकारें बन गई लेकिन वह कागज जेब से बाहर नहीं निकल सका। अब सुप्रीम कोर्ट में कहा गया है कि इस मामले में कोई सबूत नहीं है।

तीन तलाक के मुद्दे पर उन्होंने कहा कि हम इसका समर्थन करते हैं लेकिन इसे अपराध घोषित करने के खिलाफ हैं. इसे अपराध घोषित कर देने के कारण पति को जब जेल हो जाएगी तो उसके परिवार की देखभाल कौन करेगा।

हर गरीब के खाते में 15 लाख रूपए और हर साल दो करोड़ युवाओं को रोजगार देने के बीजेपी के वायदों का जिक्र करते हुए आजाद ने कहा कि अब 2022 तक किसानों की आय दोगुनी करने की बात की जा रही है।

उन्होंने इसे किसानों के लिए एक और लॉलीपॉप कहा कि बजट में एक साल की बात होती थी लेकिन इसमें चार साल की बात की जा रही है ताकि चुनाव से पहले सवालों का जवाब नहीं देना पड़े।

शौचालयों का जिक्र करते हुए उन्होंने संयुक्त राष्ट्र की एक रिपोर्ट का जिक्र किया और कहा कि बड़ी संख्या में शौचालय चालू नहीं है और पानी की कमी जैसी कई समस्याओं की ओर ध्यान ही नहीं दिया गया। बजट में प्रस्तावित मेडिकल बीमा पर आपत्ति जताते हुए उन्होंने कहा कि इससे सिर्फ बीमा कंपनियों को ही फायदा होगा और मरीज नुकसान में रहेंगे।

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