राज्यसभा लाइव: 10%आरक्षण बिल पर आनंद शर्मा बोले ‘पौने 5 साल में टूटी सरकार की नींद’

नई दिल्ली। सामान्य वर्ग के लिए आर्थिक आधार पर शिक्षा और रोज़गार में दस फीसदी आरक्षण के प्रावधान वाले संविधान संशोधन विधेयक पर राज्यसभा में गर्मागर्म चर्चा चल रही है।

सरकार के फैसले की टाइमिंग पर सवाल उठाते हुए कांग्रेस नेता आनंद शर्मा ने कहा कि पौने पांच साल सरकार की नींद टूटी है और सभी जानते हैं कि चुनाव की वजह से आप यह बिल लेकर आए हैं।

आनंद शर्मा ने कहा कि संविधान संशोधन से गरीब का पेट नहीं भरेगा, उसको न्याय नहीं मिलेगा। उन्होंने कहा कि किसान के लिए, नौजवान के लिए जो वादे किए थे, उनका क्या हाल हो रहा है। सरकार को जल्दी दिखानी थी तो महिला आरक्षण बिल पर दिखाते, क्यों सरकार चार साल बाद भी यह बिल लेकर नहीं आई। राजनीति के लिए आप तीन तलाक बिल लाए लेकिन बाकी महिलाओं को न्याय कब मिलेगा।

उन्होंने कहा कि जनता एक बार वादों में बहक जाती है लेकिन बाद में हिसाब जरूर मांगती है लेकिन अब तो आपका हिसाब देने का वक्त है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस इस बिल की पक्षधर है क्योंकि हमने सामाजिक न्याय और खासकर अगड़ी जातियों के लिए न्याय की आवाज उठाई थी। हम इस बिल का समर्थन करते हैं।

आनंद शर्मा ने कहा कि नौकरियां लगातार कम हो रही हैं। उन्होंने कहा कि पीएसयू में तीन साल के दौरान 97 हजार नौकरियां चली गई हैं। राज्यों के आंकड़े अगर सरकार देगी तो बेहतर होगा। उन्होंने कहा कि लोगों के मुताबिक नौकरियां देने में शायद 800 साल लग जाएंगे।

उन्होंने कहा कि सरकार देश के लोगों को आप बड़ा सपना दिखा रही हैं, लेकिन हकीकत कुछ और है। विकास की परिधि से बाहर रह गए लोगों को जोड़ना सरकारों का धर्म है, लेकिन इस विषय पर विस्तार से चर्चा होने की जरूरत थी। इसके लिए समाज के लोगों से भी बात की जानी चाहिए थी।

आनंद शर्मा ने कहा कि सरकार की अभी इस बिल में कई बाधाओं का सामना करना है, क्योंकि यह संविधान का अपमान करने की एक सोझी-समझी साजिश है।

आनंद शर्मा ने कहा, मैं चाहता हूं कि वित्त मंत्री डाटा पेश करके बताएं कि कितने लोगों की आय 8 लाख रुपये से अधिक है? मेरे हिसाब से इसके तहत देश के 98% लोग कवर हो जाएंगे। लेकिन इस सरकार के कार्यकाल में नौकरियों तो उत्पन्न हो नहीं रही हैं।

वहीं कांग्रेस के सांसद मधुसूदन मिस्त्री ने कहा कि किसी बिल को पेश से दो दिन पहले उसकी कॉपी देनी पड़ती है, उन्होंने कहा कि एक दिन में बिल पर वोटिंग और उसका परिचय नहीं दिया जाता है। मिस्त्री ने कहा कि सदन जानना चाहता है कि सरकार को इस बिल को लाने की इतनी जल्दी क्यों है।

टीएमसी सांसद डेरेक ओ ब्रायन ने कहा कि आरक्षण बिल इसलिए लाया गया क्योंकि पिछले साढ़े चार साल में कोई रोजगार पैदा नहीं किया जा सका। भारत में गरीब उसे माना जाता है जिसकी दैनिक आमदनी 32 रुपये है, लेकिन सालाना 8 लाख रुपये कमाई के हिसाब से देखें तो रोजाना 2100 रुपये कमाने वाले गरीबी रेखा में आने चाहिए।

वहीँ सीपीआईएम के राज्यसभा सासंद टीके रंगरादन ने 124वें संविधान संशोधन विधेयक 2019 के लिए एक संशोधन पेश किया है। इससे पहले विपक्षी नेताओं ने संसद परिसर में राज्यसभा में अपनी रणनीति को लेकर अहम बैठक भी की।

ताज़ा हिंदी समाचार और उनसे जुड़े अपडेट हासिल करने के लिए फ्री मोबाइल एप डाउनलोड करें अथवा हमें फेसबुक, ट्विटर या गूगल पर फॉलो करें