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राजस्थान में एक लाख लोगों को मृत दिखाकर पेंशन की बंद

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भीलवाड़ा। राजस्थान सरकार ने राज्य के तीन लाख बुजर्ग महिलाओं और विकलागों को मृत मानकर पेंशन बंद कर दी। लेकिन इनमें से एक लाख जिंदा है, जिनमें से 60 हजार महिलाएं है। पिछले दस महीने से लोग सरकारी दफ्तरों में खुद के जिंदा होने का सबूत देकर पेंशन मांग रहे हैं, लेकिन फाइल पर उनके मृत घोषित होने के कारण, सरकार उन्हें जिंदा मानने को तैयार नहीं, ये पेंशन सामाजिक सुरक्षा के तहत दी जा रही थी।

राजस्थान के भीलवाड़ा जिले के सुवाणा पंचायत समिति के मण्डपिया गांव की मांगी देवी उम्र के शतक से महज चार साल पीछे है, पिछले सात महीने से वे बेहद परेशान है क्योंकि गुजारा करने के लिए मिलने सरकार की पांच सौ रुपए महीने की पेंशन नहीं मिल रही है, वह पंचायत से लेकर जिला कलेक्टर के दफ्तर काट आई, मगर उनके बैंक आफ बड़ौदा के इस बैंक खाते में सात महीने से पेंशन की एंट्री ही नहीं हुई।

मांगी बाई (पीड़ित पेंशन धारी) ने बताया कि “अफसरों ने कहा कि तुमारी मौत हो चुकी है, सरकारी रिकॉर्ड तुम जिंदा नहीं हो इसलिए पेंशन बंद कर दी,अब पेंशन नहीं मिलेगी लेकिन मेंने कहा मैं तो जिंदा हूं”

दरअसल सरकार ने सामाजिक सुरक्षा योजना की पेंशन में कई तरह की धांधली, दोहरी पेंशन जैसी शिकायतों की जांच के बाद 10 लाख लोगों की पेंशन रोकी, इनमें दो लाख 94 हजार केस ऐसे थे जिन्हें मृत मानते हुए पेंशन रोकी, सरकार सफाई दे रही है कि पेंशन में हो रहे फर्जीवाड़े की सुधार की कोशिश की थी।

राजस्थान में पूर्ववती अशोक गहलोत सरकार ने सामाजिक सुरक्षा योजना के तहत विधवाओं, विकलगों और बुजर्गों को 500 रुपए महीना पेंशन देना शुरु किया था, ये तादाद 68 लाख थी।पेंशन 2013 के विधानसभा और 2014 के लोकसभा चुनाव में बीजेपी औऱ कांग्रेस दोनों का चुनावी मुद्दा था। वसुंधराराजे सरकार इसे लुभाने वाली योजना मान रही थी और राजकोष पर अतिरिक्त भार होने के बावजूद पेंशन बंद नहीं की।

पेंशन में धांधलियों की शिकायत खासकर पात्र न होने की वजह से पेंशन मिलने ना मिलने की जांच की और 68 में से 10 लाख की पेंशन रोक दी लेकिन अब सामने सामने आया कि सरकार ने जिन तीन लाख लोगों की पेंशन मृत मानकर रोकी उनमें से करीब एक लाख जिंदा है ,राज्य के सामाजिक न्याय एंव अधिकारिता विभाग ने राज्य के सभी जिला कलेक्टरों को पत्र लिखकर पेंशन में गड़बड़ियों के बारे में स्टेटस रिपोर्ट मांगी।

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